लखनऊ, 1 सितंबर 2025। School Merger: उत्तर प्रदेश में सरकारी प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्कूलों के मर्जर को लेकर योगी सरकार ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण दिया है। सरकार ने 21 अगस्त 2025 को कोर्ट को बताया कि जिन स्कूलों में 50 या उससे अधिक छात्र हैं और जो एक किलोमीटर से अधिक दूरी पर स्थित हैं, उनका मर्जर नहीं किया जाएगा।
यह बयान लखनऊ बेंच में मुख्य न्यायाधीश अरुण भंसाली और जस्टिस जसप्रीत सिंह की डिवीजन बेंच के समक्ष सुनवाई के दौरान आया। कोर्ट ने सरकार को मर्जर प्रक्रिया और संबंधित आदेश को रिकॉर्ड पर पेश करने का निर्देश दिया, साथ ही सीतापुर में मर्जर पर यथास्थिति बनाए रखने का आदेश 1 सितंबर तक बढ़ाया।
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मर्जर नीति का उद्देश्य और पृष्ठभूमि
यूपी सरकार ने 16 जून 2025 को कम नामांकन वाले स्कूलों को नजदीकी बेहतर सुविधा वाले स्कूलों में मर्ज करने का आदेश जारी किया था। इसका उद्देश्य राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के तहत संसाधनों का बेहतर उपयोग और शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार करना था। राज्य में 1.32 लाख सरकारी स्कूल हैं, जिनमें से लगभग 29,000 स्कूलों में 50 से कम छात्र हैं। इनमें से 10,784 स्कूलों का मर्जर शुरू किया गया है। सरकार का तर्क है कि छोटे स्कूलों में शिक्षकों, पुस्तकालयों और डिजिटल सुविधाओं की कमी के कारण बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा नहीं मिल पाती। मर्जर से बड़े स्कूलों में बेहतर सुविधाएं और सामाजिक माहौल मिलेगा।
हाईकोर्ट का रुख और याचिकाकर्ताओं की चिंता
मर्जर के खिलाफ सीतापुर के 51 छात्रों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी, जिसमें दावा किया गया कि यह नीति संविधान के अनुच्छेद 21ए और राइट टू एजुकेशन (आरटीई) एक्ट का उल्लंघन करती है। याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया कि मर्जर से बच्चों को 1-2.5 किमी तक की अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ेगी, जो विशेष रूप से ग्रामीण और हाशिए पर रहने वाले बच्चों, खासकर लड़कियों के लिए मुश्किल होगी। कोर्ट ने 7 जुलाई को याचिकाएं खारिज करते हुए कहा कि मर्जर संवैधानिक नहीं है और सरकार को परिवहन सुविधाएं सुनिश्चित करनी चाहिए।
सरकार का आश्वासन और भविष्य की योजना
बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह ने स्पष्ट किया कि मर्जर से शिक्षकों की नौकरी पर कोई असर नहीं पड़ेगा और खाली स्कूल भवनों को बाल वाटिका (प्रारंभिक शिक्षा केंद्र) में बदला जाएगा। जिन स्कूलों में 50 से अधिक छात्र हैं या जो 1 किमी से अधिक दूरी पर हैं, उन्हें मर्ज नहीं किया जाएगा। सरकार ने यह भी वादा किया कि यदि मर्जर से बच्चों को आने-जाने में दिक्कत होती है, तो निर्णय वापस लिया जा सकता है।
विपक्ष का विरोध और सामाजिक प्रभाव
विपक्षी दलों, जैसे समाजवादी पार्टी और कांग्रेस, ने मर्जर को गरीब और हाशिए पर रहने वाले समुदायों के खिलाफ बताया है। उनका कहना है कि यह नीति ड्रॉपआउट दर बढ़ाएगी। शिक्षक संगठनों ने भी इसका विरोध किया, इसे सरकारी स्कूलों को बंद करने का छिपा प्रयास बताया।
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