लखनऊ, 22 सितंबर 2025। Yogi Government: उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश का पालन करते हुए सार्वजनिक स्थानों पर जाति के उल्लेख पर रोक लगा दी है। कार्यवाहक मुख्य सचिव दीपक कुमार ने सभी वरिष्ठ अधिकारियों को निर्देश जारी किए हैं कि एफआईआर, गिरफ्तारी मेमो, थानों के नोटिस बोर्ड, वाहनों और साइन बोर्ड पर जातीय संकेत या नारे नहीं होंगे। इसके साथ ही, जाति आधारित रैलियों और सोशल मीडिया पर जातीय कंटेंट पर भी प्रतिबंध लगाया गया है। यह फैसला पंचायत और 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले राजनीतिक दलों के लिए चुनौती बन गया है।
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सपा के गुर्जर सम्मेलन पर मंडराया खतरा
समाजवादी पार्टी (सपा) ने 2027 के विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए पश्चिमी यूपी में गुर्जर सम्मेलन शुरू किए हैं। पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजकुमार भाटी 34 जिलों के 132 विधानसभा क्षेत्रों में गुर्जर चौपाल और रैलियों के जरिए वोट बैंक को मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रहे हैं, लेकिन सरकार के नए आदेश ने इन आयोजनों पर रोक लगा दी है, जिससे सपा की रणनीति पर संकट मंडरा रहा है।
बीजेपी पर लगाया दोहरा मापदंड का आरोप
सपा प्रवक्ता राजकुमार भाटी ने सरकार के फैसले को बीजेपी की साजिश करार दिया है। उनका कहना है कि, बीजेपी स्वयं जातीय सम्मेलन आयोजित करती रही है, जैसे गाजियाबाद उपचुनाव में योगी आदित्यनाथ के रोड शो में 12 जातियों के मंच बनाए गए थे। भाटी ने कहा कि सपा का गुर्जर सम्मेलन सामाजिक न्याय के लिए है और इसे हर हाल में जारी रखा जाएगा। उन्होंने दावा किया कि बीजेपी इस आदेश के जरिए सपा की रणनीति को कमजोर करना चाहती है।
राजनीतिक दलों के लिए बड़ा झटका
यह आदेश न केवल सपा, बल्कि बहुजन समाज पार्टी (बसपा), राष्ट्रीय लोकदल (रालोद), निषाद पार्टी और सुभासपा जैसे दलों के लिए भी झटका है, जो जातीय समीकरणों के आधार पर अपनी राजनीति को मजबूत करते हैं। सपा की पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) रणनीति और बसपा की सोशल इंजीनियरिंग पर इस प्रतिबंध का गहरा असर पड़ सकता है। 2027 के चुनाव से पहले सभी दलों को अपनी रणनीति में बदलाव करना पड़ सकता है।
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