नई दिल्ली, 27 अक्टूबर 2025। Yamuna Pollution: दिल्ली में यमुना नदी के बढ़ते प्रदूषण को रोकने के लिए जांच का दायरा विस्तारित करने की योजना बन रही है। जल्द ही नदी के पानी की जांच में अमोनिया और फॉस्फेट जैसे प्रदूषकों को भी शामिल किया जाएगा। ये रसायन मुख्य रूप से डिटर्जेंट, साबुन और घरेलू अपशिष्ट से पानी में घुलते हैं, जो झाग बनने का प्रमुख कारण हैं। सर्दियों में, खासकर छठ पूजा के दौरान, यह समस्या चरम पर पहुंच जाती है, जिससे नदी का जल पूरी तरह दूषित हो जाता है।
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द एनर्जी एंड रिसोर्स इंस्टीट्यूट (टेरी) ने दिल्ली सरकार की सिफारिश पर यमुना सफाई के लिए एक व्यापक अध्ययन रिपोर्ट तैयार की है। इस रिपोर्ट में नदी प्रदूषण के स्रोतों की गहन पहचान की गई है, साथ ही संबंधित विभागों के लिए व्यावहारिक सुझाव दिए गए हैं। स्टडी के अनुसार, झाग की समस्या का मूल कारण पानी में मौजूद सरफेक्टेंट्स (डिटर्जेंट के रासायनिक तत्व) हैं, जो सतह पर फोम बनाते हैं।

रिपोर्ट में जोर दिया गया है कि प्रदूषण नियंत्रण के लिए यमुना से जुड़े सभी विभागों, जैसे जल बोर्ड, नगर निगम, पर्यावरण विभाग के बीच समन्वय आवश्यक है। वर्तमान में इनके बीच तालमेल की कमी से प्रयास विफल हो रहे हैं।टेरी ने एक सेंट्रलाइज्ड मॉनिटरिंग सिस्टम स्थापित करने का सुझाव दिया है, जो स्टेट मिशन फॉर क्लीन यमुना (SMCY) के अंतर्गत संचालित होगा। यह सिस्टम रीयल-टाइम डेटा संग्रह और विश्लेषण करेगा, जिससे प्रदूषण स्रोतों पर त्वरित कार्रवाई संभव हो सकेगी।
रिपोर्ट में पर्यावरण विभाग को 1994 के यमुना जल बंटवारा समझौते पर पुनर्विचार करने की सलाह दी गई है। इसके तहत नदी में न्यूनतम पर्यावरणीय प्रवाह (E-flow) सुनिश्चित किया जाए, ताकि प्राकृतिक सफाई प्रक्रिया मजबूत हो। दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) को निर्देश दिए गए हैं कि पानी की जांच का दायरा बढ़ाकर अमोनिया, फॉस्फेट और अन्य पैरामीटर्स को शामिल किया जाए। साथ ही, धोबी घाटों का नियमित निरीक्षण सुनिश्चित हो, जहां कपड़े धोने से सरफेक्टेंट्स सीधे नदी में मिलते हैं।
रिपोर्ट में लांड्री प्लांट्स और बड़े वाशिंग यूनिट्स में माइक्रो सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) लगाने को अनिवार्य करने की बात कही गई है। इको-फ्रेंडली डिटर्जेंट के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड्स (BIS) के साथ साझेदारी की सिफारिश की गई। विशेष रूप से, जियोलाइट और एंजाइम-आधारित डिटर्जेंट को प्रोत्साहित किया जाए, जो पर्यावरण-अनुकूल हैं और झाग कम पैदा करते हैं।

पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने रिपोर्ट का स्वागत किया और कहा, “इस स्टडी से कई व्यावहारिक सुझाव मिले हैं, जिन्हें लागू कर यमुना को साफ करने में सफलता मिलेगी।” यमुना प्रदूषण दिल्ली की राजनीति का पुराना केंद्र बिंदु रहा है। चाहे कोई भी सरकार हो, सर्दियों में नदी पर उठने वाले झाग को लेकर आरोप-प्रत्यारोप लगते रहे हैं। अभी तक झाग नियंत्रण के लिए कोई ठोस तंत्र नहीं है, लेकिन अब सरकार इस दिशा में सक्रिय हो रही है।
यदि सुझावों पर अमल हुआ, तो न केवल झाग की समस्या हल होगी, बल्कि नदी का पारिस्थितिकी तंत्र भी मजबूत होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि सामूहिक प्रयासों से यमुना को पुनर्जीवित किया जा सकता है, लेकिन इसके लिए राजनीतिक इच्छाशक्ति जरूरी है।
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