नई दिल्ली, 4 नवंबर 2025। Women’s World Cup 2025: भारतीय महिला क्रिकेट टीम की स्टार ऑलराउंडर अमनजोत कौर की शानदार प्रदर्शन ने आईसीसी महिला वनडे वर्ल्ड कप 2025 में इतिहास रच दिया। रविवार को डॉ. डीवाई पाटिल स्टेडियम, नवी मुंबई में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ 52 रनों से जीत हासिल कर भारत ने अपना पहला वर्ल्ड कप खिताब जीता, लेकिन इस जीत के पीछे एक भावुक कहानी छिपी है, जहां अमनजोत के परिवार ने दादी भगवंती के हार्ट अटैक की खबर फाइनल से पहले उनसे छुपा ली, ताकि उनकी एकाग्रता न टूटे।
इसे भी पढ़ें-Indo-Pak Match: भारत-पाक क्रिकेट मैच पर विवाद, जय शाह पर उद्धव ठाकरे का हमला
अमनजोत की 75 वर्षीय दादी भगवंती सितंबर 2025 में हार्ट अटैक का शिकार हुईं और बेडरिडन हो गईं। परिवार ने उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया, लेकिन अमनजोत को कुछ नहीं बताया। पिता भूपिंदर सिंह, जो एक बढ़ई हैं और जिन्होंने अमनजोत की पहली बल्लेबाजी सिखाई थी, ने कहा, “अमनजोत को शक हुआ कि बीजी (दादी) ठीक नहीं हैं। उन्होंने पहले बहन को फोन किया, जो बोलीं कि वे गुरुद्वारे गई हैं। फिर मुझे वीडियो कॉल पर बुलाया। मैंने दादी की तरफ से उन्हें मैच की शुभकामनाएं दिलवाईं और बताया कि ब्लड प्रेशर लो है। हार्ट अटैक की बात फाइनल के बाद ही खोली।”

भूपिंदर ने आगे बताया कि दादी अमनजोत की सबसे बड़ी समर्थक रहीं। अमनजोत मोहाली के फेज 5 में सड़क पर लड़कों के साथ गली क्रिकेट खेलने लगीं तो दादी घंटों पार्क में कुर्सी डालकर बैठी रहतीं, उन्हें प्रोत्साहित करतीं और आसपास के असामाजिक तत्वों से बचातीं। “वो मेरी पोती नहीं, बेटे से भी बढ़कर हैं,” दादी कहती रहीं। टूर्नामेंट में अमनजोत ने कमाल कर दिखाया।
ओपनर में श्रीलंका के खिलाफ 124/6 पर टीम के पतन के बीच नंबर 7 पर आकर अर्धशतक ठोका। सेमीफाइनल में ऑस्ट्रेलिया की सेंट्यूरियन फोबी लिचफील्ड का विकेट लिया। फाइनल में दक्षिण अफ्रीका की कप्तान लॉरा वोल्वार्ड्ट के सेंट्यूरी के बाद दीप्ति शर्मा की गेंद पर उनका विकेट लेने के लिए तीन बार जुगलिंग की, फिर कैच लपका यह मैच का टर्निंग पॉइंट साबित हुआ। उन्होंने पूरे टूर्नामेंट में 6 विकेट और 146 रन बनाए। कोच नागेश गुप्ता ने कहा, “उसकी रन-अप और रिस्ट पोजिशन से ही लग गया था कि ये ऑलराउंडर बनेगी। हमने स्पॉट बॉलिंग पर काम किया।”
जीत के बाद अमनजोत को सच्चाई पता चली। उन्होंने डॉक्टरों से बात की, जिन्होंने अगले दिन टेस्ट शेड्यूल किए। पिता ने बताया कि रविवार- सोमवार रात 1 बजे अमनजोत का फोन आया, “हम जीत गए, 6-7 दिन में घर आ रही हूं।” दादी ने आंखें खोलीं और मुस्कुराईं, इस खबर ने उन्हें नई जिंदगी दे दी। भूपिंदर बोले, “वर्ल्ड कप जीत ने इन तनावपूर्ण दिनों में मरहम का काम किया। दादी अगर स्वस्थ होतीं तो गुरुद्वारे में कराह प्रसाद बांटतीं।” अमनजोत ने कहा, “यह जीत इतिहास रचने जैसी है। दादी की हालत जानकर दुख हुआ, लेकिन यह शुरुआत है।”
यह कहानी परिवार के प्यार और बलिदान की मिसाल है। अमनजोत, जो हॉकी, हैंडबॉल और फुटबॉल से क्रिकेट की ओर मुड़ीं, ने 2017-18 में पंजाब के लिए डेब्यू किया। उनकी यह यात्रा दादी की दुआओं से ही संभव हुई। भारत की इस ऐतिहासिक जीत ने न सिर्फ ट्रॉफी दिलाई, बल्कि एक परिवार को फिर से जोड़ा। स्मृति मंधाना, हरमनप्रीत कौर और दीप्ति जैसी साथियों के साथ अमनजोत का योगदान अविस्मरणीय रहेगा।
इसे भी पढ़ें- Asia Cup 2025: शुभमन गिल की उप-कप्तानी पर भड़के पूर्व क्रिकेटर, अक्षर पटेल को बताया हकदार








