नई दिल्ली/वाशिंगटन,28 नवंबर 2025। White House Attack: अमेरिका में व्हाइट हाउस के पास बुधवार को हुए आतंकी हमले के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने इमिग्रेशन नीतियों पर कड़ा रुख अपनाते हुए बड़ा कदम उठाया है। USCIS (यूएस सिटिजनशिप एंड इमिग्रेशन सर्विसेज) के डायरेक्टर जोसेफ एडलो ने शुक्रवार को घोषणा की कि 19 ‘हाई-रिस्क’ या चिंताजनक देशों से आए सभी ग्रीन कार्ड होल्डर्स के आवेदनों की सख्ती से दोबारा जांच की जाएगी।
यह फैसला राष्ट्रपति ट्रंप के निर्देश पर लिया गया है, जो अमेरिकी सुरक्षा को सर्वोपरि मानते हुए पिछली बाइडेन सरकार की ‘लापरवाह रीसेटलमेंट पॉलिसी’ पर हमला बोल रहे हैं। हमले का मुख्य आरोपी अफगान नागरिक रहमानुल्लाह लकनवाल है, जो 2021 में बाइडेन प्रशासन के ‘ऑपरेशन एलाइज वेलकम’ प्रोग्राम के तहत अमेरिका आया था। उसने व्हाइट हाउस के पास दो नेशनल गार्ड सदस्यों पर गोलीबारी की, जिसमें यूएस आर्मी स्पेशलिस्ट सारा बेकस्ट्रॉम (20) की मौके पर मौत हो गई और यूएस एयर फोर्स स्टाफ सार्जेंट एंड्रयू वोल्फ (24) की हालत गंभीर बनी हुई है।
लकनवाल, जो पहले सीआईए के साथ काम कर चुका था, ने 2024 में शरण की अर्जी दी थी, जिसे अप्रैल 2025 में ट्रंप प्रशासन ने मंजूर किया था। ट्रंप ने इसे ‘राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा’ बताते हुए कहा कि बाइडेन युग में 20 मिलियन ‘अज्ञात और अनवेटेड विदेशियों’ को प्रवेश दिया गया, जिसका खामियाजा अमेरिकी जनता भुगतेगी। नई पॉलिसी के तहत USCIS अधिकारी इमिग्रेशन रिक्वेस्ट की समीक्षा के दौरान इन 19 देशों के मूल निवासियों के लिए विशेष फैक्टर्स पर नजर रखेंगे।
ये देश हैं- अफगानिस्तान, म्यांमार, बुरुंडी, चाड, कांगो गणराज्य, क्यूबा, इक्वेटोरियल गिनी, इरिट्रिया, हैती, ईरान, लाओस, लीबिया, सिएरा लियोन, सोमालिया, सूडान, टोगो, तुर्कमेनिस्तान, वेनेजुएला और यमन। ये वही देश हैं, जिन पर ट्रंप ने जून 2025 में ट्रैवल बैन लगाया था। इसके अलावा, अफगान नागरिकों से जुड़ी सभी इमिग्रेशन रिक्वेस्ट्स को तुरंत अनिश्चितकाल के लिए रोक दिया गया है। बाइडेन युग में मंजूर सभी आश्रय मामलों की भी समीक्षा होगी।
एडलो ने कहा, “अमेरिका और उसके लोगों की सुरक्षा सबसे ऊपर है। पिछली सरकार की लापरवाही का बोझ हम नहीं उठाएंगे।” भारतीय समुदाय के लिए राहत की बात यह है कि भारत इन 19 देशों में शामिल नहीं है। अमेरिका में रहने वाले लाखों भारतीय ग्रीन कार्ड होल्डर्स पर इस कार्रवाई का कोई सीधा असर नहीं पड़ेगा। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि यह नीति समग्र इमिग्रेशन प्रक्रिया को और सख्त कर देगी, जिससे अन्य देशों के आवेदकों को भी कठिनाई हो सकती है।
ट्रंप ने वीडियो संदेश में इसे ‘आतंकवाद का कार्य’ बताते हुए वाशिंगटन में अतिरिक्त नेशनल गार्ड तैनाती का ऐलान किया। यह कदम ट्रंप की ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति का हिस्सा है, जो उनके दूसरे कार्यकाल में और तेज हो गया है। DHS ने स्पष्ट किया कि यह गाइडेंस 27 नवंबर 2025 से लागू होगी और सभी पेंडिंग या नई रिक्वेस्ट्स पर असर डालेगी। अमेरिकी संसद में इसकी आलोचना भी हो रही है, जहां डेमोक्रेट्स इसे ‘भेदभावपूर्ण’ बता रहे हैं। फिलहाल, यह फैसला इमिग्रेशन डिबेट को नई ऊंचाई दे रहा है।
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