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Viksit Bharat 2047: लखनऊ, कानपुर और आगरा में बिछेगा मेट्रो का जाल, योजना को मिली केंद्र की मंजूरी

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Lucknow Metro

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लखनऊ, 25 दिसंबर 2025। Viksit Bharat 2047: उत्तर प्रदेश के तीन प्रमुख शहरों लखनऊ, कानपुर और आगरा में मेट्रो नेटवर्क के दीर्घकालिक विस्तार की राह अब पूरी तरह साफ हो गई है। केंद्र सरकार के आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय ने इन शहरों के लिए 2047 तक की मेट्रो विकास योजना तैयार करने पर अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) जारी कर दिया है। इसके साथ ही उत्तर प्रदेश मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (यूपीएमआरसी) ने ‘विजन डॉक्यूमेंट 2047’ के तहत लॉन्ग-टर्म प्लान बनाने की प्रक्रिया तेज कर दी है।

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यह योजना ‘विकसित भारत @2047’ के विजन से प्रेरित है, जिसका लक्ष्य तेजी से बढ़ते शहरीकरण के बीच आधुनिक, पर्यावरण-अनुकूल और कुशल सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था स्थापित करना है। योजना के अनुसार, लखनऊ में मेट्रो नेटवर्क को 225 किलोमीटर, कानपुर में 200 किलोमीटर और आगरा में 100 किलोमीटर तक विस्तारित किया जाएगा।

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तीनों शहरों में कुल 525 किलोमीटर से अधिक का नया मेट्रो जाल बिछेगा। यह विस्तार शहरों की बढ़ती आबादी, नए आवासीय एवं व्यावसायिक क्षेत्रों और औद्योगिक विकास को ध्यान में रखकर किया जाएगा। यूपीएमआरसी के प्रबंध निदेशक सुशील कुमार ने बताया कि योजना केवल वर्तमान जरूरतों तक सीमित नहीं है, बल्कि 2025 से 2047 तक की शहरी परिवहन आवश्यकताओं के लिए एक मजबूत रोडमैप तैयार किया जा रहा है।

एनओसी मिलने के बाद यूपीएमआरसी वैकल्पिक विश्लेषण रिपोर्ट (AAR) और विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार करेगा। इसमें मेट्रो के अलावा लाइट मेट्रो, मेट्रोलाइट या अन्य मास रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (MRTS) की संभावनाओं का भी मूल्यांकन होगा। विशेष रूप से नए विकास क्षेत्रों में मेट्रो रूट और स्टेशन इस तरह डिजाइन किए जाएंगे कि भविष्य में बसने वाली आबादी को सीधी कनेक्टिविटी मिले। इससे ट्रैफिक जाम, प्रदूषण और यात्रा समय में भारी कमी आएगी।

समन्वित विकास के लिए यूपीएमआरसी ने लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए), कानपुर विकास प्राधिकरण (केडीए), आगरा विकास प्राधिकरण (एडीए) और उत्तर प्रदेश आवास एवं विकास परिषद को पत्र लिखकर सहयोग मांगा है। इनसे मास्टर प्लान, भूमि उपयोग की रूपरेखा और प्रस्तावित परियोजनाओं की डिटेल्स उपलब्ध कराने को कहा गया है।

इसका उद्देश्य मेट्रो रूट को शहरों के भावी मास्टर प्लान से पूरी तरह संरेखित करना है, ताकि स्टेशन उन इलाकों में बनें जहां आर्थिक गतिविधियां और जनसंख्या केंद्रित होंगी।शहरी नियोजन विशेषज्ञों के अनुसार, यह योजना ट्रैफिक व्यवस्था को क्रांतिकारी बदलाव देगी। अक्सर मेट्रो और शहरी विकास में तालमेल की कमी से स्टेशन दूर पड़ जाते हैं, लेकिन इस बार समन्वय से यह समस्या दूर होगी।

इससे न केवल यातायात सुगम होगा, बल्कि आर्थिक विकास को गति मिलेगी, प्रदूषण कम होगा और जीवन स्तर ऊंचा उठेगा। योगी सरकार की यह पहल उत्तर प्रदेश को विकसित भारत का मजबूत स्तंभ बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। आने वाले वर्षों में इन शहरों की तस्वीर पूरी तरह बदल जाएगी।

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