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US Bankruptcy Crisis: ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में 15 साल का रिकॉर्ड टूटा, 700+ बड़ी कंपनियां हो चुकी हैं दिवालिया

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नई दिल्ली, 8 दिसंबर 2025। US Bankruptcy Crisis: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने दूसरे कार्यकाल की शुरुआत “अमेरिका को फिर से महान बनाने” के जोशीले वादों के साथ की थी, लेकिन आठ महीने बाद उनकी नीतियां उल्टी पड़ रही हैं। ताबड़तोड़ टैरिफ लगाने की उनकी रणनीति ने वैश्विक व्यापार को प्रभावित किया है, जिसमें भारत पर 50% टैरिफ भी शामिल है। नतीजा? अमेरिकी अर्थव्यवस्था संकट के गर्त में डूब रही है। 2025 में बड़ी कंपनियों के दिवालिया मामलों की संख्या 15 साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है।

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नवंबर तक 717 बड़ी कंपनियां दिवालिया हो चुकी हैं, जबकि छोटी कंपनियों की संख्या 2,221 से अधिक है। एसएंडपी ग्लोबल मार्केट इंटेलिजेंस के आंकड़ों के मुताबिक, 2025 में अक्टूबर तक 655 बड़ी कंपनियां दिवालिया हुईं, जो 2024 के पूरे साल के 687 मामलों से ज्यादा है। यह 2010 के बाद का सबसे ऊंचा आंकड़ा है। नवंबर में अकेले 62 बड़ी कंपनियां दिवालिया घोषित हुईं, जबकि अक्टूबर में 68 और सितंबर में 66। कुल मिलाकर, 2022 के मुकाबले दिवालिया मामलों में 93% की तेजी आई है।

यह संख्या 2011-2024 के सालाना औसत से 30% अधिक है। लगातार तीसरे साल दिवालिया दर बढ़ रही है, जो महामंदी जैसी स्थिति की चेतावनी दे रही है।  दिवालिया का कारण टैरिफ, महंगाई और कर्ज का बोझ है। ट्रंप प्रशासन की व्यापार युद्ध नीति ने छोटी-मध्यम कंपनियों को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाया है। उच्च उधारी लागत (हाई बोरिंग कॉस्ट), उपभोक्ताओं की सतर्क खरीदारी और आर्थिक अनिश्चितता ने कमाई को चोट पहुंचाई।

ब्लूमबर्ग के अनुसार, ट्रंप के टैरिफ ने इनपुट कॉस्ट बढ़ा दिया, जिससे छोटे व्यवसायों की आय प्रभावित हुई। सबचैप्टर V (छोटी कंपनियों के लिए विशेष दिवालिया प्रावधान) के तहत 2025 में 2,221 मामले दर्ज हुए, जो पिछले साल से 83% अधिक है। फ्लोरिडा की ट्रस्टी कैरोल फॉक्स ने कहा, “लगता है जैसे कर्जदाता सांसों के पीछे पड़े हैं।” इंडस्ट्रियल और कंज्यूमर डिस्क्रेशनरी सेक्टर सबसे प्रभावित हैं।

एक रिपोर्ट में कहा गया कि, ट्रंप के बदलते टैरिफ नीतियों ने अनिश्चितता बढ़ाई, जबकि फेडरल रिजर्व की ऊंची ब्याज दरें कर्ज चुकाने को मुश्किल बना रही हैं। उपभोक्ता खर्च ठंडा पड़ रहा है, बेरोजगारी बढ़ रही है और महंगाई चिपकी हुई है। घरेलू कर्ज 18.39 ट्रिलियन डॉलर पर पहुंच गया, जो रिकॉर्ड है।

ट्रंप की नीतियां उल्टी?

ट्रंप ने वादा किया था कि टैरिफ से अमेरिकी उद्योग मजबूत होंगे, लेकिन वास्तविकता विपरीत है।  मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर नौ महीनों से सिकुड़ रहा है, और कई कंपनियां टैरिफ को सीधे छंटनी का कारण बता रही हैं। कांग्रेस अब एसबीए लोन सीमा दोगुनी करने पर विचार कर रही है ताकि छोटे निर्माताओं को राहत मिले। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि 2025 में दिवालिया ट्रेंड जारी रहेगा, जब तक ब्याज दरें न गिरें और टैरिफ नीति न बदले। यह संकट अमेरिकी अर्थव्यवस्था की कमजोरी उजागर कर रहा है। ट्रंप प्रशासन का दावा है कि टैरिफ से नौकरियां लौटेंगी, लेकिन आंकड़े कुछ और कह रहे हैं। क्या यह “महान अमेरिका” का अंतिम अध्याय है? समय बताएगा।

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