महोबा, 31 दिसंबर 2025। UP SIR: उत्तर प्रदेश के महोबा जिले में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के तहत मतदाता सूची पुनरीक्षण के दौरान बड़े पैमाने पर अनियमितताएं सामने आई हैं। ड्राफ्ट सूची में वर्तमान ग्राम प्रधानों सहित हजारों जीवित मतदाताओं के नाम गायब हैं, जबकि वर्षों पहले मृत हो चुके लोगों के नाम अभी भी शामिल हैं। यह गड़बड़ी कबरई और चरखारी ब्लॉक की ग्राम पंचायतों में प्रमुख रूप से देखी गई है, जहां अब तक दो प्रधानों समेत करीब 2450 मतदाताओं के नाम सूची से हटा दिए गए हैं। इससे ग्रामीणों में आक्रोश है और बीएलओ से लेकर अधिकारी स्तर तक हैरानी जताई जा रही है।
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कबरई ब्लॉक की श्रीनगर ग्राम पंचायत में कुल 11,533 मतदाता हैं। यहां 18 वर्ष पूर्ण करने वाले करीब 2,500 युवाओं के नाम जोड़ने के लिए बीएलओ ने आवेदन लिए थे, लेकिन नई ड्राफ्ट सूची में इसके उलट वर्तमान ग्राम प्रधान आशीष राजपूत समेत लगभग 2,300 मतदाताओं के नाम गायब पाए गए। प्रधान आशीष राजपूत ने बताया कि 2021 की सूची में उनका नाम था और वे चुनाव जीतकर प्रधान बने, लेकिन अब उनका, उनके भाई नीरज राजपूत, पूर्व प्रधान अमित दीक्षित, प्रमोद सोनी, दारा सिंह और नाथूराम सोनी जैसे कई वर्षों से मतदान करने वाले लोगों के नाम काट दिए गए।
हैरानी की बात यह है कि डुप्लीकेट मानकर नाम हटाने वाली इसी सूची में 50 से अधिक मृतकों के नाम अभी भी दर्ज हैं, जैसे 2018 में मृत अरुण कुमार, चार साल पहले दिवंगत रमाशंकर, हरिश्चंद्र और कैलाश आदि। इसी तरह चरखारी ब्लॉक के नटर्रा गांव में दूसरी बार प्रधान बनीं गायत्री देवी का नाम भी सूची से गायब है। उन्होंने डीएम को शिकायत देकर बताया कि गांव के 150 मतदाताओं के नाम कट गए हैं। नए फॉर्म भरने के बावजूद कई नाम नहीं जुड़े।
बीएलओ सुनील कुमार ने फीडिंग में तकनीकी गड़बड़ी को इसका कारण बताया। सहायक जिला निर्वाचन अधिकारी आरपी विश्वकर्मा ने कहा कि आधार नंबर मिसमैच या अन्य कारणों से कुछ नाम हटाए गए हैं। जांच चल रही है और सभी ब्लॉकों के बीडीओ को नोडल अधिकारी बनाया गया है। प्रभावित लोग प्रपत्र-2 के साथ आधार कार्ड की कॉपी बीएलओ को जमा करें, तो अंतिम सूची में नाम जुड़ जाएंगे।
यह मामला पूरे राज्य में चल रहे SIR का हिस्सा है, जहां डुप्लीकेट, मृत और शिफ्टेड वोटर्स को हटाया जा रहा है। महोबा में यह गड़बड़ी पंचायत चुनावों से पहले प्रशासन के लिए चुनौती बनी हुई है। ग्रामीणों का कहना है कि इससे उनका मताधिकार प्रभावित होगा। अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि दावे-आपत्ति की अवधि में सभी सुधार कर लिए जाएंगे।
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