लखनऊ, 5 दिसंबर 2025। UP Politics: उत्तर प्रदेश की सियासत में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले नया तूफान खड़ा हो गया है। असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM ने खुलेआम ऐलान कर दिया है कि वह यूपी में मुस्लिम बहुल 80-100 सीटों पर पूरी ताकत से चुनाव लड़ेगी। इसका सीधा असर समाजवादी पार्टी के गढ़ माने जाने वाले मुस्लिम वोट बैंक पर पड़ेगा, जिससे अखिलेश यादव का बहुचर्चित PDA (पिछड़ा-दलित-अल्पसंख्यक) फॉर्मूला गहरे संकट में दिख रहा है।
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2024 लोकसभा चुनाव में सपा-कांग्रेस गठबंधन ने PDA के नाम पर मुस्लिम + यादव + कुछ दलित-ओबीसी वोटों को जोड़कर 43 सीटें जीती थीं। उस वक्त मुस्लिम वोटों का बड़ा हिस्सा (लगभग 65-70%) सपा के पक्ष में एकतरफा गया था, लेकिन अब ओवैसी ने ठान लिया है कि “सपा के नाम पर मुसलमानों का एकतरफा वोट लेना बंद होना चाहिए।” AIMIM ने अपना दल (कमेरावादी) के साथ मिलकर PDM (पिछड़ा-दलित-मुस्लिम) न्याय मोर्चा बना लिया है, जो PDA का खुला मुकाबला करेगा।
पिछले दिनों महाराष्ट्र में AIMIM ने 5 सीटें जीतकर और बिहार में 5 विधायक बनाकर अपनी ताकत दिखाई है। यूपी में भी पार्टी ने जमीनी तैयारी शुरू कर दी है। सहारनपुर, रामपुर, मुरादाबाद, संभल, अमरोहा, बिजनौर, बदायूं, बरेली जैसे जिलों में AIMIM के कार्यकर्ता घर-घर जाकर मुसलमानों से सीधा संवाद कर रहे हैं। 2023 नगर निकाय चुनाव में ही पार्टी ने पश्चिमी यूपी में कई जगहों पर 8-15% तक वोट हासिल किए थे।
अब 2027 के लिए पार्टी 50 से अधिक सीटों पर अपना प्रत्याशी खड़ा करने की तैयारी में है। सपा खेमे में बेचैनी साफ दिख रही है। अखिलेश यादव ने बिहार हार के बाद PDA में फेरबदल करते हुए अल्पसंख्यक की जगह “आधी आबादी” (महिलाएं) जोड़ दी थी, लेकिन मुस्लिम वोट खिसकने का डर अभी भी बना हुआ है। पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, “अगर AIMIM ने 6-8% मुस्लिम वोट भी काट लिया, तो 70-80 सीटें हमारे हाथ से फिसल सकती हैं।”
भाजपा इसे मौके के रूप में देख रही है। उसका गणित साफ है – मुस्लिम वोट जितना बंटेगा, उतना ही उसे फायदा। ओवैसी ने लखनऊ में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर साफ कहा, “सपा ने मुसलमानों को सिर्फ वोट बैंक बनाकर रखा है। नौकरियों में हिस्सा नहीं, शिक्षा में हिस्सा नहीं। हम PDA का असली हक दिलाएंगे।” इससे सपा के मुस्लिम चेहरों में भी बेचैनी बढ़ गई है। कई नेता चुपके-चुपके AIMIM से संपर्क साध रहे हैं। कुल मिलाकर, 2027 का यूपी चुनाव अब सिर्फ सपा-भाजपा का द्विपक्षीय मुकाबला नहीं रहा। AIMIM तीसरे कोण के रूप में उभर रही है, जो सपा के लिए सबसे बड़ा सिरदर्द बनने वाली है।
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