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UP Politics: यूपी में ब्राह्मण विधायकों की बैठक से गरमाई सियासत, सपा का BJP विधायकों को खुला ऑफर 

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लखनऊ,25 दिसंबर 2025। UP Politics: उत्तर प्रदेश की राजनीति में ब्राह्मण विधायकों की एक बैठक ने नई हलचल मचा दी है। विधानमंडल के शीतकालीन सत्र के बीच मंगलवार शाम हुई इस बैठक को भले ही सामाजिक भोज बताया जा रहा हो, लेकिन इसमें जातिगत एकजुटता और राजनीतिक प्रतिनिधित्व के मुद्दों पर गहन चर्चा हुई।

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भाजपा के करीब 50 ब्राह्मण विधायक और एमएलसी शामिल हुए, जो मुख्य रूप से बुंदेलखंड और पूर्वांचल से थे। बैठक कुशीनगर के भाजपा विधायक पंचानंद पाठक के आवास पर आयोजित की गई थी। बैठक में ब्राह्मण समाज की एकता मजबूत करने, हालिया घटनाओं में समाज को निशाना बनाए जाने और राजनीतिक पार्टियों द्वारा की जा रही उपेक्षा पर बात हुई।

सूत्रों के अनुसार, भाजपा में ब्राह्मणों को उचित सम्मान और प्रतिनिधित्व न मिलने का मुद्दा प्रमुख रहा। पार्टी की सफलता में ब्राह्मणों की बड़ी भूमिका होने के बावजूद, संगठन और सरकार में अन्य जातियों को ज्यादा तरजीह दिए जाने की शिकायतें उठीं।

निषाद पार्टी के विधायक अनिल त्रिपाठी ने कहा कि बैठक का मुख्य विषय समाज को अपमानित किए जाने और सामाजिक-राजनीतिक नुकसान पहुंचाने पर था।इससे पहले क्षत्रिय और कुर्मी समाज की बैठकें हो चुकी हैं, जिससे जातिगत राजनीति के कयासों को बल मिल रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बैठक जाति-आधारित सत्ता संकेत का हिस्सा है, जहां ब्राह्मण समाज खुद को राजनीतिक रूप से हाशिए पर महसूस कर रहा है।

बैठक में मीरजापुर विधायक रत्नाकर मिश्रा, शलभ मणि त्रिपाठी, ऋषि त्रिपाठी, प्रेमनारायण पांडेय, प्रकाश द्विवेदी, रमेश मिश्रा, अंकुर राज तिवारी, विनय द्विवेदी और एमएलसी साकेत मिश्रा जैसे प्रमुख नेता शामिल थे। आयोजक पाठक ने स्पष्ट किया कि यह एक सामान्य भोज था, जिसमें भूमिहार बिरादरी के प्रतिनिधि भी थे, और इसका कोई राजनीतिक मकसद नहीं है। उन्होंने कहा कि सुख-दुख में एक-दूसरे का साथ देने पर चर्चा हुई।

विपक्षी समाजवादी पार्टी (सपा) ने इस मौके को भुनाने की कोशिश की। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने एक्स पर तंज कसते हुए लिखा, “जब बड़े लोग आ ही रहे हैं तो मुख्यमंत्री जी उनको उस भोज से भी अवगत करा दें, जो उनके खिलाफ विधायकों ने आयोजित किया था।” वहीं, सपा महासचिव शिवपाल यादव ने मीडिया से कहा कि भाजपा में ब्राह्मणों की उपेक्षा हो रही है, और अगर वे नाराज हैं तो सपा में आने पर पूरा सम्मान मिलेगा।

भाजपा ने इसे सामाजिक कार्यक्रम बताकर खारिज किया, लेकिन विपक्ष इसे भाजपा के अंदर असंतोष का संकेत मान रहा है। हाल के लोकसभा चुनावों में भाजपा को झटका लगा था, जहां जातिगत समीकरणों ने बड़ी भूमिका निभाई।राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि क्या यह बैठक योगी सरकार के लिए चिंता का विषय बनेगी? विशेषज्ञों का कहना है कि जातिगत एकीकरण की यह प्रवृत्ति आगामी चुनावों को प्रभावित कर सकती है। फिलहाल, बैठक ने यूपी की सियासत को गरमा दिया है, और आगे की घटनाएं इसका असर तय करेंगी।

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