लखनऊ, 12 दिसंबर, 2025। UP News: उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने राज्य में आवश्यक सेवाओं की निरंतरता सुनिश्चित करने के लिए बड़ा कदम उठाया है। कैबिनेट की बैठक में बुधवार को आवश्यक सेवा संरक्षण अधिनियम (एस्मा) को अगले छह महीनों के लिए लागू करने का फैसला लिया गया। इस अधिनियम के तहत अब कोई भी सरकारी कर्मचारी, अर्ध-सरकारी कर्मचारी या स्थानीय निकाय के कर्मचारी हड़ताल नहीं कर सकेंगे। यदि वह हड़ताल किसी आवश्यक सेवा से जुड़ी हो।
एस्मा लागू होने के साथ ही राज्य सरकार को यह अधिकार मिल जाता है कि वह किसी भी सरकारी विभाग या निकाय को “आवश्यक सेवा” घोषित कर सके। इसके बाद उस सेवा से जुड़े कर्मचारियों द्वारा हड़ताल करना या हड़ताल के लिए उकसाना गैर-कानूनी हो जाता है। उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का प्रावधान है, जिसमें छह महीने तक की कैद या जुर्माना या दोनों हो सकते हैं।
सरकार का तर्क है कि लोकसभा चुनाव के बाद अब विधान परिषद के द्विवार्षिक चुनाव और विभिन्न स्थानीय निकायों के चुनाव होने हैं। साथ ही बजट सत्र भी निकट है। ऐसे में किसी भी तरह की हड़ताल से जनता को आवश्यक सेवाओं में बाधा पहुंच सकती है, जिसे रोकना जरूरी है। पिछले कुछ महीनों में शिक्षक, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, आउटसोर्स कर्मचारी, स्वास्थ्य कर्मी आदि विभिन्न वर्गों ने अपनी मांगों को लेकर आंदोलन या हड़ताल की चेतावनी दी थी। इस पृष्ठभूमि में सरकार ने एहतियातन एस्मा को फिर से लागू कर दिया।
गौरतलब है कि, उत्तर प्रदेश में एस्मा को समय-समय पर लागू किया जाता रहा है। पिछले साल भी लोकसभा चुनाव के दौरान इसे छह महीने के लिए लागू किया गया था, जिसकी अवधि अब समाप्त हो रही थी। नई मंजूरी के बाद यह अधिनियम जून 2026 तक प्रभावी रहेगा।कर्मचारी संगठनों ने इस फैसले की आलोचना की है।
उनका कहना है कि सरकार वार्ता के बजाय दमनकारी कानूनों का सहारा ले रही है। वहीं सरकार का कहना है कि आवश्यक सेवाओं में किसी भी तरह की रुकावट बर्दाश्त नहीं की जाएगी और कर्मचारियों की जायज मांगों को बातचीत से हल किया जाएगा, लेकिन हड़ताल का रास्ता बंद रहेगा।
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