झांसी, 27 दिसंबर 2025। UP Crime: उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र में दशकों तक आतंक का पर्याय रहे कुख्यात गैंगस्टर और पूर्व ब्लॉक प्रमुख लेखराज यादव (76) की गुरुवार रात दिल्ली के डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई। वह हत्या, गैंगस्टर एक्ट समेत कई गंभीर मामलों में गाजियाबाद की डासना जेल में बंद थे। अक्टूबर में वाराणसी जेल से इलाज के लिए उन्हें डासना शिफ्ट किया गया था।
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जेल अधिकारियों के अनुसार, लेखराज लीवर सिरोसिस, डायबिटीज और अन्य गंभीर बीमारियों से पीड़ित थे। उनका इलाज एम्स, मेरठ और गाजियाबाद के अस्पतालों में चल रहा था। 22 दिसंबर को उन्हें एम्स दिल्ली ले जाया गया, जहां से वापसी की तारीख दी गई, लेकिन तबीयत बिगड़ने पर पहले एमएमजी अस्पताल, फिर एम्स और अंत में डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल रेफर किया गया, जहां उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई।
पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया। शनिवार को झांसी के रानीपुर कस्बे में उनका अंतिम संस्कार होगा। लेखराज के खिलाफ यूपी और मध्य प्रदेश में 60 से अधिक मामले दर्ज थे, जिनमें हत्या, लूट, रंगदारी और अवैध खनन शामिल हैं।
सियासी संरक्षण से मिली ताकत
झांसी के रानीपुर कस्बे के निवासी लेखराज यादव बुंदेलखंड में खौफ का दूसरा नाम थे। समर्थक उन्हें ‘लंकेश’ या ‘पापाजी’ कहते थे। सियासी संरक्षण ने उन्हें इतना ताकतवर बना दिया कि पुलिस भी उन पर हाथ डालने से हिचकती थी। वह अपने अहाते में दरबार लगाते और न्याय के नाम पर अपनी मर्जी चलाते।
इलाके के लोग उनके फैसलों को मानने को मजबूर होते। गाड़ियों के काफिले के साथ घूमने वाले लेखराज ने छोटे-मोटे अपराधियों को जोड़कर मजबूत नेटवर्क बनाया। यूपी में वारदात करने के बाद मध्य प्रदेश में शरण लेते और वहां मदद करने वालों की समय पर सहायता करते। सियासी रसूख के दम पर वह बंगरा ब्लॉक के दो बार प्रमुख बने, उनकी बहू शशि यादव को भी ब्लॉक प्रमुख बनवाया।
बेटा भगत सिंह और पत्नी राम मूर्ति रानीपुर नगर पंचायत के चेयरमैन रहे। जेल जाने के बाद भी पत्नी ने चुनाव जीता। लेखराज जमीन कब्जा, अवैध खनन और अन्य धंधों में शामिल रहे। उनकी दबंगई का नमूना 17 दिसंबर 2006 की घटना है, जब उन्होंने तत्कालीन भाजयुमो जिलाध्यक्ष मनोज श्रोत्रिय, दीपचंद्र, विमल और मोनी पाल को सरेआम गोलियों से भून डाला।
इस घटना से इलाका दहल गया। लेखराज मध्य प्रदेश भाग गए। 2019 में दस्यु उन्मूलन विशेष अदालत ने उन्हें और उनके आठ गुर्गों को उम्रकैद की सजा सुनाई, जिसके बाद वह जेल में थे।
लंबा आपराधिक रिकॉर्ड
हिस्ट्रीशीटर लेखराज मऊरानीपुर थाने का गैंग लीडर था। उनके गैंग में बेटा जय हिंद यादव, रामस्वरूप, महेंद्र सिंह समेत नौ सदस्य थे। झांसी में ही 25 मामले दर्ज थे, जिनमें मऊरानीपुर में 22 (हत्या, हत्या का प्रयास, रंगदारी आदि)।
बेटे जय हिंद पर 21, रामस्वरूप पर 22 और महेंद्र पर सात मुकदमे थे। एक वायरल ऑडियो क्लिप ने हंगामा मचाया था, जिसमें मऊरानीपुर कोतवाल सुनीत सिंह लेखराज से मुठभेड़ की चर्चा कर रहे थे। क्लिप लीक होने पर कोतवाल को नौकरी गंवानी पड़ी और योगी सरकार पर सवाल उठे। इससे पहले पुलिस मुठभेड़ में लेखराज भागने में सफल रहे थे।
2022 में कन्नौज जेल से झांसी कोर्ट पेशी पर लाते समय पुलिस काफिले पर हमला कर उन्हें छुड़ाने की कोशिश हुई। इस मामले में पूर्व विधायक दीपनारायण यादव समेत कई पर मुकदमा दर्ज हुआ और वे जेल गए। लेखराज की मौत से बुंदेलखंड के अपराध जगत में एक युग का अंत हो गया। उनके समर्थक जहां शोक मना रहे हैं, वहीं आम लोग राहत की सांस ले रहे हैं।
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