लखनऊ, 29 नवंबर 2025। Unfinished Project: उत्तर प्रदेश की महत्वाकांक्षी गंगा एक्सप्रेस-वे परियोजना, जो 2019 में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा पुनः शुरू की गई थी, लेकिन आज तक पूरी नहीं हुई। चार साल बीत जाने के बावजूद, इस 594 किलोमीटर लंबे छह लेन (आठ लेन तक विस्तार योग्य) ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे का निर्माण पूरा नहीं हो सका है। मेरठ के बीजौली से प्रयागराज के जुड़ापुर दांडू तक फैला यह प्रोजेक्ट, गंगा नदी के समानांतर 10 किलोमीटर की दूरी पर बनाया जा रहा है, पर्यावरण मानकों का पालन करते हुए।
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अनुमानित लागत 36,230 करोड़ रुपये की इस योजना का लक्ष्य पूर्वी और पश्चिमी यूपी को जोड़ना है, लेकिन देरी ने यात्रियों और व्यापारियों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। प्रोजेक्ट की शुरुआत 2007 में मायावती सरकार द्वारा हुई थी, लेकिन बजट की कमी से ठप हो गया। 2019 में योगी सरकार ने इसे पुनर्जीवित किया और चरण-1 के लिए 2,000 करोड़ का बजट आवंटित किया।
उत्तर प्रदेश एक्सप्रेस-वे इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी (UPEIDA) द्वारा निष्पादित यह परियोजना 12 जिलों—मेरठ, हापुड़, अमरोहा, संभल, बदायूं, शाहजहांपुर, हरदोई, फर्रुखाबाद, कन्नौज, कानपुर, उन्नाव और प्रयागराज से होकर गुजरेगी। वर्तमान में, नवंबर 2025 तक कुल कार्य 89% पूरा हो चुका है, लेकिन पूर्ण संचालन में अभी भी देरी है। जून 2025 में 84% प्रगति बताई गई थी, जबकि अगस्त तक यह 89% पहुंच गई।
देरी के प्रमुख कारणों में दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में लागू ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP-4) की पाबंदियां शामिल हैं, जिन्होंने मेरठ, हापुड़ और बुलंदशहर में निर्माण कार्य रोका। मूल रूप से दिसंबर 2024 तक मुख्य कैरिजवे पूरा करने का लक्ष्य था, लेकिन पर्यावरणीय प्रतिबंधों और अन्य चुनौतियों से समयसीमा मार्च-अप्रैल 2025 तक खिसक गई। फिर भी, योगी आदित्यनाथ ने अक्टूबर 2025 में UPEIDA की समीक्षा बैठक में दिसंबर 2025 तक पूर्णता का निर्देश दिया।
उन्होंने साप्ताहिक प्रगति समीक्षा और गुणवत्ता पर कोई समझौता न करने का आदेश जारी किया। इसके अलावा, भूमि अधिग्रहण और निवेशकों की देरी ने भी बाधा उत्पन्न की। परियोजना की खासियतें इसे अनोखा बनाती हैं। इसमें 14 प्रमुख पुल, 7 रेल ओवर ब्रिज (ROB), 32 फ्लाईओवर और 26 अंडरपास शामिल हैं। सबसे बड़ा इंजीनियरिंग चमत्कार 960 मीटर लंबा गंगा नदी पर पुल (मेरठ-बदायूं के बीच) और 720 मीटर का रामगंगा नदी पर पुल है। शाहजहांपुर के पास 3.5 किलोमीटर लंबा इमरजेंसी लैंडिंग स्ट्रिप भारतीय वायुसेना के लिए विकसित किया गया, जहां मई 2025 में Su-30MKI, मिराज-2000 जैसे विमानों का सफल परीक्षण हुआ।
दो मुख्य टोल प्लाजा और नौ सुविधा परिसर (फूड कोर्ट, रेस्ट एरिया सहित) यात्रियों के लिए आराम प्रदान करेंगे। पर्यावरण संरक्षण के लिए 18.55 लाख पौधे लगाए गए हैं। एक बार पूरा होने पर, मेरठ से प्रयागराज की यात्रा वर्तमान 10-12 घंटे से घटकर मात्र 6-8 घंटे हो जाएगी। यह एक्सप्रेस-वे यूपी को 1 ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी बनाने की दिशा में रीढ़ की हड्डी बनेगा। इससे दिल्ली-एनसीआर से पूर्वांचल तक माल ढुलाई तेज होगी, रोजगार सृजन होगा और महाकुंभ 2025 जैसे आयोजनों में यातायात सुगम होगा।
हालांकि, चरण-2 (बुलंदशहर-मेरठ से हरिद्वार तक 110 किमी विस्तार) 2026 के बाद शुरू होगा। UPEIDA ने टोल दरें भी तय की हैं कारों के लिए पूर्ण यात्रा पर लगभग 1,515 रुपये (2.55 रुपये प्रति किमी)। योगी सरकार ने निवेशकों को चेतावनी दी है कि भूमि उपयोग में तीन साल की देरी पर आवंटन रद्द हो जाएगा। अब सवाल यह है कि क्या दिसंबर 2025 तक वाहन फर्राटा भरेंगे? UPEIDA का दावा है कि शेष कार्य टोल प्लाजा, साइनेज और अंतिम परीक्षण जल्द पूरा हो जाएगा। यह परियोजना न केवल कनेक्टिविटी बढ़ाएगी, बल्कि यूपी के औद्योगिक गलियारों को मजबूत करेगी। देरी से सबक लेते हुए, भविष्य की परियोजनाओं में तेजी लानी होगी।
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