इंदौर, 16 अक्टूबर 2025। Transgender Protest: मध्य प्रदेश के इंदौर शहर में बुधवार शाम एक दिल दहला देने वाली घटना ने पूरे इलाके को हिलाकर रख दिया। नंदलालपुरा क्षेत्र में किन्नर समुदाय के दो गुटों के बीच भड़के विवाद के चलते 24 किन्नरों ने एक साथ फिनायल नामक जहरीला पदार्थ पी लिया। इसी दौरान एमवाय अस्पताल के बाहर चार किन्नरों ने खुद पर पेट्रोल डालकर आत्मदाह का प्रयास किया, लेकिन पुलिस ने तत्काल हस्तक्षेप कर उन्हें बचा लिया।
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एमवाय अस्पताल में हुए भर्ती
सभी प्रभावित किन्नरों को एमवाय अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां दो की हालत गंभीर होने के कारण उन्हें आईसीयू में रखा गया है। बाकी सभी की स्थिति स्थिर बताई जा रही है। अस्पताल के डीन डॉ. अरविंद घनघोरिया ने व्यक्तिगत रूप से स्थिति का जायजा लिया और सीएमएचओ को बेहतर इलाज के निर्देश दिए। यह हंगामा किन्नर समाज के अंदरूनी कलह का परिणाम है, जो लंबे समय से ‘गादी’ (समुदाय की परंपरागत नेतृत्व पदवी) और संपत्ति विवाद को लेकर चल रहा है।
एक गुट पायल गुरु का समर्थक है, तो दूसरा सीमा गुरु से जुड़ा हुआ। पुलिस आयुक्त संतोष सिंह ने कुछ महीनों पहले इस विवाद को सुलझाने के लिए विशेष जांच टीम (एसआईटी) गठित की थी, जिसकी अगुवाई डीसीपी ऋषिकेश मीणा कर रहे थे, लेकिन उनके ट्रांसफर के बाद जांच ठप हो गई और तीन महीने बीतने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

हाल ही में दोनों गुटों के बीच फिर से झड़प हुई, जिसके बाद अन्नपूर्णा थाने का घेराव तक हो गया। किन्नरों का कहना है कि, समाज के अंदरूनी झगड़े के अलावा बाहरी तत्व भी उन्हें परेशान कर रहे हैं। इस घटना से जुड़ा एक और गंभीर मामला सामने आया है। नंदलालपुरा की एक किन्नर ने दो मीडियाकर्मियों पंकज जैन और अक्षय कुमायूं पर दुष्कर्म, ब्लैकमेल और धमकी का आरोप लगाते हुए मंगलवार को पंढरीनाथ थाने में एफआईआर दर्ज कराई।
पीड़िता के अनुसार, 12 जून 2025 को आरोपी उसके डेरे पर पहुंचे। पंकज ने जबरन शारीरिक संबंध बनाने की कोशिश की, मना करने पर समाज को बदनाम करने और एनकाउंटर कराने की धमकी दी। इस घटना के बाद पीड़िता ने अपने गुरु को बताया और आखिरकार शिकायत दर्ज कराई। किन्नरों का आरोप है कि ऐसे बाहरी लोग उनके समुदाय का शोषण कर रहे हैं, जिससे उनका जीवन असुरक्षित हो गया है।
घटना की सूचना मिलते ही एडिशनल डीसीपी क्राइम ब्रांच राजेश दंडोतिया, एडिशनल डीसीपी दिशेष अग्रवाल और स्थानीय थाना प्रभारी मौके पर पहुंचे। पुलिस ने हंगामा शांत किया, फिनायल पीने वालों को तुरंत अस्पताल पहुंचाया और आत्मदाह के प्रयास करने वालों की बोतलें छीन लीं। अस्पताल में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। प्रारंभिक जांच में जहर पीने का सटीक कारण स्पष्ट नहीं हुआ, लेकिन किन्नरों के बयान दर्ज करने के बाद आगे की कार्रवाई होगी।
एसआईटी को फिर से सक्रिय करने पर विचार चल रहा है। यह घटना किन्नर समुदाय की पीड़ा को उजागर करती है, जो समाज के हाशिए पर जीने को मजबूर हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे विवादों को सुलझाने के लिए संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाना जरूरी है। इंदौर पुलिस ने आश्वासन दिया है कि सभी आरोपों की निष्पक्ष जांच होगी और समुदाय की सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी। किन्नरों ने कहा, “हमारा समाज हमें अपनों की तरह नहीं देखता, लेकिन हम भी इंसान हैं। न्याय मिलना चाहिए।” यह हादसा न केवल स्थानीय स्तर पर सनसनी फैला रहा है, बल्कि ट्रांसजेंडर अधिकारों पर बहस छेड़ने का काम कर रहा है।
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