काबुल, 22 सितंबर 2025। मध्य पूर्व के एक प्रमुख मुस्लिम देश ने पाकिस्तान को कड़ा संदेश देते हुए कहा है कि अगर तुरंत कदम न उठाए गए तो गंभीर परिणाम भुगतने पड़ेंगे। यह बयान पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख जनरल असिम मुनीर के खिलाफ सीधा निशाना साधता है, जिन्हें “राष्ट्रीय हितों के साथ खिलवाड़” का दोषी ठहराया गया। घटना का केंद्र बिंदु पाकिस्तान की आर्थिक अस्थिरता, आतंकवाद को पनाह देना और क्षेत्रीय शांति के लिए खतरा बनना है।
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इस देश के विदेश मंत्री ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में पाकिस्तान को “अनियंत्रित” बताते हुए चेतावनी जारी की, जो अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान की साख को और धक्का पहुंचा सकती है। यह विवाद तब भड़का जब पाकिस्तान ने हाल ही में इस मुस्लिम देश के साथ व्यापारिक समझौते को एकतरफा रद्द कर दिया, जिससे अरबों डॉलर का नुकसान हुआ। विदेश मंत्री ने कहा, “हमने बार-बार सलाह दी, लेकिन पाकिस्तान ने नजरअंदाज किया। अब अगर नहीं माने तो अंजाम भुगतने को तैयार रहें। शहबाज शरीफ और असिम मुनीर को अपनी जिम्मेदारियां समझनी होंगी।”
उन्होंने पाकिस्तान पर आतंकवादी संगठनों को समर्थन देने का भी आरोप लगाया, जो इस देश की सुरक्षा के लिए खतरा है। जनरल मुनीर को “सेना के राजनीतिकरण” का जिम्मेदार ठहराते हुए कहा गया कि इससे पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था चरमरा रही है। शरीफ सरकार पर कर्ज चुकाने में नाकामी और भ्रष्टाचार के आरोप भी लगाए गए।इस चेतावनी ने पाकिस्तान में हड़कंप मचा दिया है। इस्लामाबाद में आपात बैठक बुलाई गई, जहां शरीफ ने “मिसअंडरस्टैंडिंग” का हवाला देते हुए सफाई दी। लेकिन विपक्षी नेता इमरान खान ने इसे “सरकार की विफलता” बताते हुए हमला बोला।
पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पहले से ही संकट में है—मुद्रास्फीति 30% से ऊपर, विदेशी मुद्रा भंडार घटकर 8 बिलियन डॉलर रह गया। इस मुस्लिम देश, जो तेल समृद्ध है, ने पाकिस्तान को आर्थिक सहायता रोकने की धमकी भी दी, जो पहले 2 बिलियन डॉलर की लाइन ऑफ क्रेडिट दे चुका था। विशेषज्ञों का कहना है कि यह विवाद सऊदी अरब या UAE जैसे देश से जुड़ा हो सकता है, जो पाकिस्तान के कट्टरपंथी तत्वों से परेशान हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यह घटना पाकिस्तान को अलग-थलग कर सकती है। अमेरिका और यूरोपीय संघ ने भी पाकिस्तान से आतंकवाद पर कार्रवाई की मांग की है।
इस मुस्लिम देश ने संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान के खिलाफ प्रस्ताव लाने की चेतावनी दी। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने “दोस्ताना संबंधों” पर जोर दिया, लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठाया। इस बीच, पाकिस्तानी मीडिया में सेंसरशिप बढ़ गई, और सोशल मीडिया पर #PakistanWarning ट्रेंड कर रहा है।यह घटना दक्षिण एशिया की भू-राजनीति को प्रभावित करेगी।
पाकिस्तान को अब कूटनीतिक सुधार करने होंगे, वरना आर्थिक पतन निश्चित है। शरीफ और मुनीर पर दबाव बढ़ेगा, और सेना-सिविलियन तनाव गहरा सकता है। मुस्लिम देशों के बीच यह फूट चिंताजनक है, जो इस्लामी एकता को कमजोर करेगी। उम्मीद है कि बातचीत से विवाद सुलझेगा, लेकिन चेतावनी साफ है सुधार न हुए तो परिणाम भयानक होंगे।
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