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सबरीमाला मंदिर में चोरी हुए सोने का राज खुला, स्पॉन्सर ने बेटी की शादी में देने की बनाई थी योजना

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Sabarimala temple

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केरल, 7 अक्टूबर 2025। केरल के प्रसिद्ध सबरीमाला अयप्पा मंदिर में 2019 में हुई सोने की चोरी का रहस्य अब धीरे-धीरे खुल रहा है। मंदिर के द्वारपालक मूर्तियों पर लगे तांबे के पैनलों को सोने से मढ़ने के नाम पर चुराए गए लगभग 4.5 किलोग्राम सोने का असली मकसद सामने आया है। कोर्ट दस्तावेजों से पता चला है कि मंदिर के स्पॉन्सर उन्निकृष्णन पोट्टी ने यह सोना अपनी बेटी की शादी के लिए इस्तेमाल करने की योजना बनाई थी।

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यह खुलासा केरल हाई कोर्ट की जांच के दौरान हुआ, जिसने इस मामले में विशेष जांच दल (SIT) गठित करने का आदेश दिया है। कहानी की शुरुआत 2019 से होती है, जब मंदिर प्रबंधन ने द्वारपालक मूर्तियों के तांबे के पैनलों को हटाकर चेन्नई की एक फर्म को सोने की मढ़ाई के लिए सौंपा। मंदिर से निकाले गए पैनलों का वजन 42.8 किलोग्राम था, लेकिन फर्म को सौंपते समय यह घटकर 38.258 किलोग्राम रह गया। यानी 4.542 किलोग्राम शुद्ध सोना गायब था। इस विसंगति ने मंदिर ट्रस्ट और भक्तों में हड़कंप मचा दिया।

Sabarimala temple

उन्निकृष्णन पोट्टी, जो इस प्रोजेक्ट के प्रमुख स्पॉन्सर थे, ने मंदिर से सोने की मढ़ाई की अनुमति ली थी। लेकिन कोर्ट की जांच में सामने आया कि उनका असली इरादा बाकी बचे सोने को व्यक्तिगत उपयोग में लाना था। पोट्टी ने स्पष्ट रूप से अपनी बेटी की शादी के लिए इस सोने का इस्तेमाल करने की मंशा जाहिर की थी, जिसके लिए उन्होंने अलग से अनुमति मांगी थी। केरल हाई कोर्ट की बेंच, जिसमें जस्टिस राजा विजयराघवन वी और केवी जयकुमार शामिल थे, ने इस वजन में कमी को गंभीर अनियमितता माना।

कोर्ट ने विजिलेंस विभाग को इसकी गहन जांच करने का निर्देश दिया, जिसमें मंदिर से सोना हटाने से लेकर चेन्नई फर्म तक की पूरी प्रक्रिया की पड़ताल शामिल है। कोर्ट ने पाया कि मंदिर प्रबंधन ने इसकी पूरी जानकारी छिपाई, जिससे भक्तों का विश्वास डगमगा गया। अब SIT जांच के तहत पोट्टी और मंदिर अधिकारियों की भूमिका की गहराई से जांच होगी।यह मामला अब राजनीतिक रंग ले चुका है। विपक्ष के नेता वी डी सतीशेन ने देवास्वोम मंत्री वी एन वासावन का इस्तीफा मांग लिया है। उन्होंने विधानसभा में इस मुद्दे पर बहस की मांग की, लेकिन सरकार ने इसे ठुकरा दिया।

कांग्रेस ने आरोप लगाया कि लेफ्ट सरकार ने मंदिर की संपत्ति के साथ खिलवाड़ किया है। वहीं, सत्ताधारी LDF ने इसे पुरानी घटना बताकर टालने की कोशिश की। यह विवाद केरल विधानसभा चुनाव से ठीक पहले भड़का है, जिससे अयप्पा भक्तों में आक्रोश बढ़ रहा है। मंदिर के वार्षिक उत्सव ‘मंडल पूजा’ के दौरान यह मुद्दा और गरमाया, जहां भक्तों ने पारदर्शिता की मांग की।

सबरीमाला मंदिर, जो लाखों भक्तों की आस्था का केंद्र है, इस घोटाले से अपनी चमक खो रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि मंदिर ट्रस्ट को संपत्ति प्रबंधन में सख्ती बरतनी चाहिए। जांच पूरी होने पर दोषियों को सजा मिलनी चाहिए, ताकि भक्तों का विश्वास बहाल हो। यह घटना न केवल धार्मिक विश्वास को झकझोर रही है, बल्कि केरल की राजनीति को भी नया मोड़ दे रही है।

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