नई दिल्ली, 24 नवंबर 2025। Supreme Court: भारतीय न्यायपालिका के इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ा गया जब जस्टिस सूर्यकांत ने सोमवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के हाथों भारत के 53वें मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) के रूप में शपथ ग्रहण की। राष्ट्रपति भवन में आयोजित भव्य समारोह में जस्टिस सूर्यकांत ने हिंदी में शपथ ली, जिसमें उन्होंने संविधान का पालन करने और निष्ठापूर्वक कर्तव्यों का निर्वहन करने का संकल्प लिया।
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यह समारोह जस्टिस बी.आर. गवई के सेवानिवृत्त होने के ठीक एक दिन बाद हुआ, जिन्होंने रविवार शाम को अपना पद छोड़ा। जस्टिस सूर्यकांत का कार्यकाल लगभग 15 महीने का होगा। वे 9 फरवरी 2027 को 65 वर्ष की आयु पूर्ण होने पर सेवानिवृत्त होंगे। 30 अक्टूबर 2025 को केंद्र सरकार द्वारा उनकी नियुक्ति की घोषणा की गई थी, जो न्यायपालिका में एक महत्वपूर्ण कदम था।
शपथ ग्रहण समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, लोकसभा स्पीकर ओम बिरला, गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल जैसे प्रमुख नेता उपस्थित रहे। इस अवसर पर न्यायिक बंधुता और संवैधानिक मूल्यों की मजबूती पर जोर दिया गया। जस्टिस सूर्यकांत का न्यायिक सफर प्रेरणादायक रहा है। हरियाणा के मूल निवासी जस्टिस सूर्यकांत ने 2000 में हरियाणा के सबसे युवा महाधिवक्ता के रूप में सेवा शुरू की।
2001 में उन्हें वरिष्ठ अधिवक्ता का दर्जा मिला और 9 जनवरी 2004 को वे पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के स्थायी न्यायाधीश बने। उन्होंने कई महत्वपूर्ण निर्णय लिखे, जिनमें नागरिक अधिकारों और संवैधानिक मुद्दों पर गहन विश्लेषण शामिल था। 5 अक्टूबर 2018 से वे हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश रहे। 24 मई 2019 को सुप्रीम कोर्ट में पदोन्नत होने के बाद उन्होंने अनुच्छेद 370 की समाप्ति, नागरिकता अधिकार, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, बिहार निर्वाचन सूची संशोधन, पेगासस जासूसी कांड और हाल ही में राज्यपाल एवं राष्ट्रपति की विधेयक संबंधी शक्तियों पर राष्ट्रपति संदर्भ जैसे ऐतिहासिक फैसलों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
नवंबर 2024 से वे सुप्रीम कोर्ट विधिक सेवा समिति के अध्यक्ष भी हैं। शपथ ग्रहण से पहले मीडिया से बातचीत में जस्टिस सूर्यकांत ने अपनी प्राथमिकताओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट और पूरे देश के न्यायालयों में लंबित मामलों को कम करना उनका प्रमुख लक्ष्य होगा। इसके लिए वे सभी उच्च न्यायालयों के साथ सहयोग करेंगे ताकि जिला एवं अधीनस्थ न्यायालयों की कार्यप्रणाली में बाधाओं का समाधान हो सके।
वे तकनीकी नवाचारों, जैसे ई-कोर्ट सिस्टम को मजबूत बनाने और न्यायिक बुनियादी ढांचे के विस्तार पर जोर देंगे। उनका मानना है कि त्वरित न्याय से ही लोकतंत्र मजबूत होता है। यह नियुक्ति भारतीय न्यायपालिका के लिए एक सकारात्मक संकेत है, खासकर जब देश विभिन्न सामाजिक-आर्थिक चुनौतियों से जूझ रहा है। जस्टिस सूर्यकांत के नेतृत्व में सुप्रीम कोर्ट संवैधानिक मूल्यों की रक्षा करते हुए समावेशी न्याय सुनिश्चित करने की दिशा में आगे बढ़ेगा। उनका कार्यकाल न केवल लंबित मामलों के निपटारे पर केंद्रित रहेगा, बल्कि न्यायिक सुधारों को गति भी देगा। राष्ट्रपति मुर्मु ने शपथ के बाद जस्टिस सूर्यकांत को बधाई देते हुए कहा कि उनकी अनुभवी नेतृत्व क्षमता न्यायपालिका को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगी।
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