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Sunderkand Path: शनिवार को सुंदरकांड का पाठ करने से मिलती है हनुमानजी की विशेष कृपा, दूर होता है हर संकट

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Sunderkand Path

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लखनऊ, 5 दिसंबर 2025। Sunderkand Path:  हिंदू धर्म में सुंदरकांड का पाठ अत्यंत फलदायी माना जाता है, लेकिन शनिवार के दिन सुंदरकांड का पाठ करने का महत्व और भी बढ़ जाता है। शनिवार भगवान हनुमान और शनिदेव दोनों का दिन होता है। इस दिन सुंदरकांड पढ़ने या सुनने से हनुमानजी की कृपा तो मिलती ही है, साथ ही शनि की साढ़े-साती, ढैय्या और कुंडली के अन्य दोष भी शांत होते हैं।

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शनिवार को सुंदरकांड पाठ के प्रमुख लाभ

संकटों से तुरंत मुक्ति – सुंदरकांड में हनुमानजी की लंका यात्रा और अशोक वाटिका की घटनाएं वर्णित हैं। यह पाठ हर तरह के भय, रोग, शत्रु और आर्थिक संकट को दूर करता है।
शनि दोष से राहत – शनिवार को हनुमानजी की पूजा शनि के प्रकोप को कम करती है। सुंदरकांड पाठ से शनि की दशा सुधरती है, नौकरी-व्यवसाय में रुकावटें दूर होती हैं।
आत्मविश्वास और साहस में वृद्धि – हनुमानजी की भक्ति से व्यक्ति में अद्भुत शक्ति और आत्मबल आता है।
मनोकामनाएं पूर्ण – विवाह, संतान, नौकरी, कोर्ट-कचहरी जैसे रुके काम पूरे होते हैं।
घर में सकारात्मक ऊर्जा – नियमित पाठ से घर में नकारात्मक शक्तियां दूर रहती हैं।

शनिवार को सुंदरकांड पाठ का सही तरीका

सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें। हनुमानजी को लाल या नारंगी आसन पर विराजमान करें।
हनुमानजी के सामने घी का दीपक और लाल पुष्प चढ़ाएं। चमेली का तेल मिला घी का दीपक जलाएं।
सबसे पहले हनुमान चालीसा, उसके बाद बजरंग बाण पढ़ें या सुनें।
फिर शुद्ध उच्चारण के साथ सुंदरकांड का पाठ करें। अगर पूरा पाठ न कर पायें तो कम से कम “जातायोध्या पुरी अति पावनी…” से “सुनि हनुमंत हृदय अति भाए…” तक का भाग जरूर पढ़ें।
पाठ के बाद हनुमानजी की आरती करें और गुड़-चना या बेसन के लड्डू का प्रसाद बांटें।
पाठ पूरा होने पर 11 बार “राम दूत यही महावीर…” या “मनोजवं मारुततुल्यवेगं…” मंत्र जपें।

खास टिप्स

महिलाएं भी शनिवार को सुंदरकांड पढ़ सकती हैं। मासिक धर्म के दौरान सिर्फ सुनें, स्पर्श न करें।
पाठ करते समय लाल कपड़ा ओढ़ें या लाल आसन पर बैठें।
शाम 4 से 7 बजे के बीच पाठ करना सर्वोत्तम माना जाता है।

जो भक्त श्रद्धा और नियम से शनिवार को सुंदरकांड का पाठ करता है, उसके जीवन से दुख-दारिद्र्य दूर होकर सुख-समृद्धि और शांति की प्राप्ति होती है।

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