गाजियाबाद, 28 अक्टूबर 2025। Parali Jalana: गाजियाबाद में प्रदूषण का कहर बढ़ता जा रहा है। दिवाली के बाद शहर की हवा जहरीली हो चुकी है, जहां रविवार को एयर क्वॉलिटी इंडेक्स (AQI) 313 के स्तर पर पहुंच गया था, जो सोमवार को थोड़ा घटकर 286 हो गया। फिर भी, घनी स्मॉग की चादर ने लोगों का जीना मुहाल कर दिया है। इसी क्रम में जिलाधिकारी (DM) ने पराली जलाने पर कड़ी कार्रवाई के लिए नए नियम जारी किए हैं। अब किसानों पर जितने एकड़ में पराली जलाई गई, उसी के अनुपात में भारी जुर्माना लगेगा।
सुप्रीम कोर्ट, राज्य सरकार और नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के दिशा-निर्देशों के तहत यह सख्ती अमल में लाई गई है, ताकि दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में वायु प्रदूषण को रोका जा सके। DM ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि, प्रदूषण फैलाने वालों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा। नए नियमों के तहत जुर्माना जलाई गई भूमि के आकार पर आधारित होगा। यदि दो एकड़ तक की जमीन पर पराली जलाई जाती है, तो 5 हजार रुपये का जुर्माना लगेगा।

दो से पांच एकड़ के बीच जलाने पर 10 हजार रुपये, जबकि पांच एकड़ से अधिक क्षेत्र में पराली जलाने पर 30 हजार रुपये तक का पर्यावरणीय मुआवजा वसूला जाएगा। यह व्यवस्था किसानों को फसल अवशेष जलाने से रोकने के लिए डिजाइन की गई है। प्रशासन का मानना है कि यह कदम न केवल तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित करेगा, बल्कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को कम करने में भी मददगार साबित होगा।
गाजियाबाद जैसे संवेदनशील जिले में, जहां पराली जलाना वायु प्रदूषण का प्रमुख कारण है, यह नियम विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। कार्रवाई के लिए प्रशासन ने बहु-स्तरीय व्यवस्था की है। हर तहसील में एसडीएम की अगुवाई में एक मोबाइल टीम (सचल दस्ता) गठित की गई है, जो सूचना मिलते ही मौके पर पहुंचकर तुरंत एक्शन लेगी। राजस्व विभाग के लेखपालों को निर्देश दिए गए हैं कि वे पराली जलाने की घटना पकड़ने पर सबूत इकट्ठा करें और दोषी किसान को ‘कारण बताओ नोटिस’ जारी करें। सभी थाना प्रभारियों को अपने क्षेत्रों में सतर्क रहने का आदेश है।

वे किसानों को गोष्ठियों, वॉट्सऐप ग्रुप्स और अन्य माध्यमों से जागरूक करेंगे कि पराली जलाना स्वास्थ्य और पर्यावरण के लिए घातक है। इसके अलावा, नगर निगम और नगर पालिका क्षेत्रों में कूड़ा जलाने पर भी सख्ती बरती जाएगी। अपर जिलाधिकारी इसकी निगरानी करेंगे और अधिकारियों की जवाबदेही तय करेंगे। गाजियाबाद में पराली जलाने की घटनाएं पहले भी प्रदूषण बढ़ाने का बड़ा कारण रही हैं। सैटेलाइट निगरानी से पता चलता है कि, धान की कटाई के बाद किसान अक्सर जल्दबाजी में अवशेष जलाते हैं, जो दिल्ली तक स्मॉग पहुंचा देता है।
सरकार वैकल्पिक उपायों जैसे बेलर मशीन, हापर और सुपर एसएमआर जैसी तकनीकों को बढ़ावा दे रही है, लेकिन उल्लंघन पर अब जीरो टॉलरेंस पॉलिसी है। किसान संगठनों ने इन नियमों का स्वागत किया है, लेकिन सब्सिडी और मशीनरी उपलब्धता बढ़ाने की मांग भी की है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यह सख्ती बनी रही, तो आने वाले दिनों में AQI में सुधार हो सकता है। प्रशासन ने अपील की है कि किसान सहयोग करें और साफ-सुथरे खेती के तरीकों को अपनाएं। यह कदम न केवल गाजियाबाद, बल्कि पूरे एनसीआर के लिए एक मिसाल कायम करेगा।
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