लखनऊ, 10 दिसंबर 2025। SIR Survey: उत्तर प्रदेश में अवैध घुसपैठ पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सरकार ने सख्ती का नया अध्याय लिखा है। विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) सर्वे के दौरान पकड़े जाने वाले बांग्लादेशी, रोहिंग्या और अन्य घुसपैठियों की विस्तृत बायोमेट्रिक प्रोफाइल तैयार की जाएगी।
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यह देश का पहला ऐसा डेटाबेस होगा, जिसमें फिंगरप्रिंट, फेस रिकग्निशन और आईरिस स्कैन शामिल होंगे। साथ ही, सभी नाम ‘निगेटिव लिस्ट’ में दर्ज होंगे, ताकि वे दोबारा फर्जी पहचान से पनाह न ले सकें। यह फैसला हालिया उच्चस्तरीय बैठक में लिया गया, जो घुसपैठियों को ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ की तरह निष्कासित करने का प्लान है। SIR सर्वे में अब तक हजारों संदिग्ध पहचाने जा चुके हैं, खासकर पश्चिमी यूपी के जिलों में।
सरकार ने घुसपैठियों के फर्जी दस्तावेजों को स्कैन करने के लिए हाईटेक सॉफ्टवेयर अपनाया है। इससे पता चलेगा कि वे कब से छिपकर रह रहे हैं और किस तरह सरकारी योजनाओं का दुरुपयोग कर रहे थे। पकड़े गए घुसपैठियों को अस्थाई डिटेंशन सेंटर में रखा जाएगा, जहां पहचान पूरी होने पर उन्हें मूल देश डिपोर्ट किया जाएगा।
सूत्रों के अनुसार, यह निगेटिव लिस्ट केंद्रीय एजेंसियों के साथ शेयर होगी, जिससे दोबारा प्रवेश असंभव हो जाएगा। डिटेंशन सेंटरों की व्यवस्था भी क्रांतिकारी है। मेरठ मंडलायुक्त ने 15,000 लोगों की क्षमता वाले हाईटेक सेंटर का डेमो मॉडल सीएम को सौंपा है। इसमें त्रिस्तरीय सुरक्षा कवच होगा- बायोमेट्रिक एंट्री (थंब इंप्रेशन, फेस रिकग्निशन), पूरे परिसर में AI-सक्षम CCTV कैमरे, अलग कंट्रोल रूम और 50 केंद्रीय सुरक्षा बल (CISF) जवानों की 24×7 तैनाती।
प्रवेश के लिए ग्रीन सिग्नल जरूरी होगा। गृह विभाग की मंजूरी के बाद 17 नगर निगमों में ऐसे सेंटर बनेंगे। अगर घुसपैठियों की संख्या ज्यादा हुई तो एक से अधिक सेंटर भी संभव। पुरुष-महिला ब्लॉक अलग होंगे, साथ ही मेडिकल और बेसिक सुविधाएं। योगी सरकार का यह कदम ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति का हिस्सा है। सीएम ने सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि SIR के जरिए पहचान तेज करें और डिटेंशन सेंटर तैयार रखें।
इससे न सिर्फ आंतरिक सुरक्षा मजबूत होगी, बल्कि पात्र नागरिकों को सरकारी लाभ भी सुनिश्चित होंगे। विपक्ष ने इसे ‘मानवाधिकार उल्लंघन’ बताया, लेकिन सरकार इसे ‘राष्ट्रीय सुरक्षा’ का मुद्दा मान रही है। यह प्लान पूरे देश के लिए मॉडल बनेगा।
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