लखनऊ/फतेहपुर, 27 नवंबर 2025। उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले में शादी के ठीक एक दिन पहले 25 वर्षीय लेखपाल सुधीर कुमार कोरी की आत्महत्या ने प्रशासनिक लापरवाही पर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेष गहन संशोधन (SIR) ड्यूटी के अत्यधिक दबाव और निलंबन की धमकी से तंग आकर सुधीर ने मंगलवार सुबह घर में फांसी लगा ली। खजुहा कस्बे के निवासी सुधीर बिंदकी तहसील में लेखपाल के पद पर तैनात थे और जहानाबाद विधानसभा क्षेत्र में SIR कार्यों के पर्यवेक्षक थे।
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इस घटना ने न केवल परिवार को सदमे में डाल दिया, बल्कि राज्य स्तर पर सरकारी कर्मचारियों की मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं को उजागर कर दिया है। सुधीर की शादी बुधवार को तय थी और हल्दी-मेहंदी जैसे संस्कार चल रहे थे। परिजनों के अनुसार, 22 नवंबर को तहसील सभागार में मतदाता पुनरीक्षण बैठक थी, जिसमें शादी की तैयारियों के कारण सुधीर शामिल नहीं हो सके। सहायक समीक्षा अधिकारी (SDM) संजय कुमार सक्सेना ने उनकी अनुपस्थिति पर निलंबन के निर्देश दिए, जिससे वे गहरे मानसिक तनाव में चले गए।
मंगलवार सुबह करीब 6:30 बजे कानूनगो शिवराम उनके घर पहुंचे और SIR प्रपत्रों की फीडिंग कराने का दबाव बनाया। आरोप है कि उन्होंने सुधीर को धमकी दी, “काम नहीं किया तो बर्खास्त कर देंगे।” इससे आहत होकर सुधीर कमरे में चले गए और कुछ ही देर बाद फांसी लगा ली। मृतक की बहन अमृता ने तहरीर दी कि कानूनगो ने निजी व्यक्ति को पैसे देकर काम कराने की सलाह भी दी, जो अपमानजनक था। सुधीर दलित समुदाय से थे और 2024 में कड़ी मेहनत के बाद लेखपाल की नौकरी हासिल की थी। वे सड़क किनारे अंडे बेचने से लेकर MNREGA मजदूर तक का सफर तय कर चुके थे। परिवार में मां और बहन पर उनका आर्थिक बोझ था, पिता की पहले ही मौत हो चुकी थी।
घटना के बाद UP लेखपाल एसोसिएशन ने तीव्र विरोध प्रदर्शन किया। उन्होंने शव को पोस्टमॉर्टम के लिए ले जाने से 9 घंटे रोका और FIR दर्ज कराने की मांग की। आखिरकार, बिंदकी थाने में SDM (RO) और कानूनगो पर आत्महत्या के लिए उकसाने समेत IPC की गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज हुआ। ADM अवनीश त्रिपाठी ने कहा कि सुधीर को 10 दिनों की छुट्टी मंजूर हो चुकी थी, लेकिन एसोसिएशन ने दबाव और धमकी का आरोप लगाया।
पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। इस बीच, समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस घटना को SIR ड्यूटी के दुखद परिणाम बताते हुए तीखा प्रहार किया। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा, “यूपी में SIR के दौरान मानसिक-शारीरिक रूप से आहत होने के कारण जिन लोगों की जान जा रही है, उनके लिए चुनाव आयोग से सीधी अपील है कि 1 करोड़ का मुआवजा दे। हम भी प्रत्येक मृतक के आश्रित को 2 लाख रुपये की सहायता राशि देने का संकल्प लेते हैं।”
अखिलेश ने इसे प्रशासनिक क्रूरता का प्रतीक बताया और कहा कि SIR जैसे अभियानों में कर्मचारियों पर अनावश्यक बोझ डालना घातक है। यह मांग हाल की अन्य घटनाओं से प्रेरित लगती है, जहां बरेली में BLO सरवेश कुमार गंगवार की हार्ट अटैक से मौत और गोंडा में विपिन कुमार यादव ने जहर खाकर सुसाइड किया।विपक्ष ने सरकार पर निशाना साधा। कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनाते ने ट्वीट किया, “फतेहपुर में SIR पर्यवेक्षक सुधीर कुमार ने शादी से एक दिन पहले फांसी लगा ली।
क्या यही है नया भारत?” लेखपाल एसोसिएशन ने गुरुवार से SIR बहिष्कार की चेतावनी दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि SIR जैसे चुनावी कार्यों में कर्मचारियों की मानसिक स्वास्थ्य जांच और छुट्टी नीतियों को मजबूत करना जरूरी है। सुधीर की मंगेतर काजल ने कहा, “वह बार-बार कहते थे कि काम का दबाव सहन नहीं हो रहा।” यह घटना न केवल एक परिवार का दर्द है, बल्कि सिस्टम की विफलता का आईना भी। क्या अखिलेश की मांग पर चुनाव आयोग कार्रवाई करेगा? आने वाले दिनों में जांच के नतीजे ही सच्चाई बयां करेंगे।
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