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SIR Pressure: SIR और e-KYC के दबाव से तंग रोजगार सेवक ने खाया जहर, प्रशासन ने शुरू की जांच

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SIR Pressure

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झांसी, 11 दिसंबर 2025। SIR Pressure: उत्तर प्रदेश के झांसी जिले के मऊरानीपुर विकासखंड के ग्राम भानपुरा में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। गांव के रोजगार सेवक और बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) नाथूराम आर्य ने बुधवार शाम कथित तौर पर काम के भारी दबाव के चलते जहर खाकर आत्महत्या की कोशिश की।

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गंभीर हालत में उन्हें पहले मऊरानीपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) ले जाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद डॉक्टरों ने झांसी मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया। फिलहाल उनका इलाज मेडिकल कॉलेज में चल रहा है और स्थिति स्थिर बताई जा रही है। घटना की सूचना मिलते ही अपर जिलाधिकारी (एडीएम) शिव प्रताप सहित कई प्रशासनिक अधिकारी मेडिकल कॉलेज पहुंचे और पीड़ित के परिजनों से बातचीत की।

परिजनों ने आरोप लगाया कि नाथूराम पर स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) के काम के साथ-साथ मनरेगा जॉब कार्ड की ई-केवाईसी पूरा करने का भारी दबाव था। ब्लॉक स्तर के अधिकारी लगातार फोन करके काम जल्द पूरा करने की धमकी दे रहे थे। सबसे बड़ी समस्या गांव में इंटरनेट कनेक्शन की थी, जो बेहद कमजोर होने के कारण ई-केवाईसी का काम लगभग असंभव हो रहा था।

परिजनों का कहना है कि इसी मानसिक तनाव और दबाव के चलते नाथूराम ने यह घातक कदम उठाया। दूसरी ओर, प्रशासन ने परिजनों के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि नाथूराम ने एसआईआर का सारा काम एक सप्ताह पहले ही सफलतापूर्वक पूरा कर लिया था। एडीएम शिव प्रताप ने मीडिया को बताया, “मऊरानीपुर विकासखंड में नाथूराम रोजगार सेवक के पद पर तैनात हैं। उन्हें विषाक्त पदार्थ खाने की सूचना मिली है।

एसआईआर का कार्य उन्होंने समय से पहले अच्छे ढंग से पूरा कर लिया था। अब यह पता लगाया जा रहा है कि आखिर उन्होंने ऐसा कदम क्यों उठाया। पूरी घटना की गहन जांच कराई जा रही है और जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसके आधार पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।” यह घटना ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन के दौरान फील्ड स्तर के कर्मचारियों पर पड़ रहे अत्यधिक दबाव को उजागर करती है।

मनरेगा और चुनाव संबंधी कार्यों में लगे रोजगार सेवक और बीएलओ अक्सर कम संसाधनों के बीच भारी लक्ष्य पूरा करने की जिम्मेदारी निभाते हैं। इंटरनेट कनेक्टिविटी की कमी जैसे बुनियादी मुद्दे काम को और जटिल बना देते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में प्रशासन को संवेदनशीलता दिखाते हुए कर्मचारियों के मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान देना चाहिए।

फिलहाल नाथूराम की हालत स्थिर है और पुलिस-प्रशासन स्तर पर जांच जारी है। अगर परिजनों के आरोप साबित हुए तो संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग तेज हो सकती है। यह मामला पूरे प्रदेश में ग्राम स्तर के कर्मचारियों की कार्यस्थिति पर सवाल खड़े कर रहा है।

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