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Shravasti Hadasa: मूंगफली समझकर जहरीला जंगली बीज खाया, 30 बच्चों की बिगड़ी तबीयत,10 की हालत बेहद नाजुक

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Shravasti Hadasa

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श्रावस्ती, 15 नवंबर 2025। Shravasti Hadasa: उत्तर प्रदेश के श्रावस्ती जिले में एक दिल दहला देने वाली घटना ने ग्रामीण इलाकों में दहशत फैला दी है। भिनगा थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले केवलपुर (केशवपुर) गांव में शाम के समय खेतों में घूमने निकले 30 मासूम बच्चों ने जंगली क्षेत्र में बिखरे रण के जहरीले बीजों को मूंगफली समझकर खा लिया। यह जहरीला पदार्थ, जो स्थानीय रूप से ‘रण’ के नाम से जाना जाता है, बच्चों की आंतों में घुलते ही उल्टी, दस्त, पेट दर्द और सांस लेने में तकलीफ पैदा करने लगा।
रात होते-होते सभी बच्चों की हालत अचानक बिगड़ गई, जिससे परिवारों में हड़कंप मच गया। घटना की जानकारी मिलते ही परिजनों ने फौरन बच्चों को नजदीकी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया, लेकिन हालत की गंभीरता को देखते हुए सभी को जिला चिकित्सालय भेज दिया गया। यहां चिकित्सकों ने तुरंत एंटी-टॉक्सिन इंजेक्शन, आईवी फ्लूइड और मॉनिटरिंग शुरू की। वर्तमान में 20 बच्चे स्थिर हैं और खतरे से बाहर बताए जा रहे हैं, लेकिन 10 बच्चों की हालत बेहद नाजुक बनी हुई है।
इनमें से कुछ को वेंटिलेटर पर रखा गया है, जबकि अन्य पर सतत निगरानी की जा रही है। चिकित्सक डॉ. राजेश कुमार ने बताया, “यह रण का बीज अत्यंत विषैला होता है, जो पाचन तंत्र को बुरी तरह प्रभावित करता है। समय पर इलाज से ज्यादातर बच्चे बच जाएंगे, लेकिन देरी घातक साबित हो सकती है। “यह हादसा गरीबी और जागरूकता की कमी का दर्दनाक चित्रण करता है। गांव के अधिकांश परिवार मजदूरी पर निर्भर हैं और बच्चे अक्सर खेतों में लकड़ियां बीनने या खेलने जाते हैं।
भूख लगने पर वे जंगली फल-बीजों को भोजन समझ लेते हैं। स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, यह पहली बार नहीं है जब ऐसी घटना हुई हो। पिछले साल भी इसी इलाके में कुछ बच्चे जहरीली जड़ी-बूटियां खाने से बीमार पड़े थे। प्रशासन ने तत्काल स्वास्थ्य टीम भेजी है, जो गांव में जागरूकता अभियान चला रही है। जिलाधिकारी ने आदेश दिए हैं कि, स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों पर बच्चों को जंगली पदार्थों से दूर रहने की ट्रेनिंग दी जाए। साथ ही, वन विभाग को निर्देश हैं कि ऐसे विषैले पौधों की पहचान कर उन्हें हटवाया जाए। यह घटना पूरे राज्य में अलार्म बजा रही है।
विशेषज्ञों का कहना है कि, ग्रामीण क्षेत्रों में पोषण की कमी और पर्यावरणीय जागरूकता के अभाव में ऐसे हादसे बढ़ रहे हैं। सरकार को अब स्कूल मिड-डे मील कार्यक्रम को मजबूत करने और जंगलों में चेतावनी बोर्ड लगाने की जरूरत है। फिलहाल, अस्पताल में भर्ती बच्चों के परिजन दुआएं मांग रहे हैं। उम्मीद है कि सभी बच्चे जल्द स्वस्थ होकर अपने परिवारों के पास लौट आएंगे। यह दुखद घटना हमें याद दिलाती है कि छोटी सी लापरवाही कितनी भारी पड़ सकती है।

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