नई दिल्ली, 4 नवंबर 2025। कांग्रेस सांसद शशि थरूर के वंशवादी राजनीति पर तीखे लेख ने राजनीतिक हलकों में तूफान मचा दिया है। अपने लेख ‘इंडियन पॉलिटिक्स आर ए फैमिली बिजनेस’ में थरूर ने भारत की राजनीति को ‘पारिवारिक व्यापार’ करार देते हुए नेहरू-गांधी परिवार पर सीधा हमला बोला। उन्होंने लिखा कि नेहरू-गांधी परिवार आजादी के आंदोलन से जुड़ा होने के बावजूद वंशवाद को बढ़ावा दे रहा है, जो लोकतंत्र के लिए खतरा है।
थरूर ने तर्क दिया कि जब सत्ता काबिलियत के बजाय खानदान से तय होती है, तो प्रशासन की गुणवत्ता गिरती है। उम्मीदवारों की मुख्य योग्यता अगर उपनाम हो, तो आम लोगों की चुनौतियों से कट जाते हैं और जवाबदेही की कमी रहती है। उन्होंने अब्दुल्ला, मुफ्ती, पटनायक, ठाकरे, पासवान, तेजस्वी यादव, बादल और करुणानिधि परिवारों का भी जिक्र किया, जो वंशवाद के उदाहरण हैं।
Very insightful piece written by Dr Shashi Tharoor on how Indian Politics have become a family business – he has launched a direct attack on India’s Nepo kid Rahul & Chota nepo kid Tejaswi Yadav !
Dr Tharoor writes :
For decades, one family has towered over Indian politics.… pic.twitter.com/zIAoR0LJ9G— Shehzad Jai Hind (Modi Ka Parivar) (@Shehzad_Ind) November 3, 2025
इस बयान से कांग्रेस में खलबली मच गई। पार्टी ने बचाव की मुद्रा अपनाई, जबकि भाजपा को राहुल गांधी पर प्रहार करने का सुनहरा मौका मिल गया। कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने थरूर के आरोपों को खारिज करते हुए कहा, “पंडित नेहरू देश के सबसे सक्षम पीएम थे। इंदिरा गांधी ने जीवन बलिदान किया, राजीव गांधी ने भी। क्या भाजपा ने ऐसा समर्पण दिखाया?” उन्होंने वंशवाद के नाम पर गांधी परिवार की सेवा को चुनौती दी।
कांग्रेस नेता राशिद अल्वी ने तर्क दिया कि लोकतंत्र में पारिवारिक पृष्ठभूमि से किसी को रोकना उचित नहीं। “जनता फैसला करती है। हर क्षेत्र में बाप-बेटे का सिलसिला चलता है, राजनीति अपवाद क्यों? आपराधिक इतिहास वाले राजनेता समाज की सच्चाई दिखाते हैं,” उन्होंने कहा। दलित नेता उदित राज ने गांधी परिवार का खुलकर बचाव किया। उन्होंने कहा, “डॉक्टर का बेटा डॉक्टर, व्यापारी का बेटा व्यापारी बनता है, राजनीति में भी यही। टिकट जाति-परिवार पर बंटते हैं।”
उदित ने अमित शाह और ममता बनर्जी पर भी वंशवाद बढ़ाने का आरोप लगाया, जो भाजपा और तृणमूल को निशाने पर लेता है। भाजपा ने इस मुद्दे को हाथों-हाथ लिया। प्रवक्ता शहजाद जयहिंद ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर तंज कसा, “थरूर ने नेपो किड राहुल गांधी और छोटे नेपो तेजस्वी पर हमला बोला। 2017 में मैंने राहुल के खिलाफ बोला तो फर्स्ट फैमिली ने बदला लिया। थरूर के लिए प्रार्थना कर रहा हूं।”
भाजपा ने इसे कांग्रेस की आंतरिक कलह का सबूत बताया, जबकि पार्टी ने थरूर को ‘अपना’ मानते हुए कहा कि उनका इरादा सामान्य आलोचना था। यह विवाद बिहार चुनाव के बीच आया है, जहां वंशवाद मुद्दा बन सकता है। थरूर का लेख ‘द हिंदू’ में प्रकाशित हुआ, जो राजनीतिक बहस को गहरा रहा है। क्या यह कांग्रेस की एकजुटता पर सवाल खड़े करेगा या भाजपा को मजबूत करेगा? समय बताएगा। कुल मिलाकर, वंशवाद भारतीय सियासत का पुराना दंश है, जो अब खुली चुनौती बन रहा है।
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