लखनऊ, 8 नवंबर 2025। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में सफाई व्यवस्था पर एक बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। खुफिया विभाग की ताजा रिपोर्ट ने दावा किया है कि नगर निगम के लगभग 15,000 सफाईकर्मियों में से 80 प्रतिशत बांग्लादेशी या रोहिंग्या घुसपैठिए हैं। यह खुलासा न केवल नगर निगम में हड़कंप मचा रहा है, बल्कि राज्य सरकार को भी सतर्क कर दिया है।
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आउटसोर्सिंग कंपनियों और ठेकेदारों द्वारा सस्ते श्रम के लालच में इन संदिग्ध विदेशियों को नियोजित करने का आरोप लगाया जा रहा है, जो राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा पैदा कर सकता है। रिपोर्ट के अनुसार, लखनऊ नगर निगम (एलएमसी) के सफाई विभाग में ठेके पर काम करने वाले अधिकांश कर्मचारी अवैध रूप से देश में प्रवेश करने वाले बांग्लादेशी और म्यांमार के रोहिंग्या समुदाय के सदस्य हैं।

ये लोग फर्जी दस्तावेजों के सहारे नौकरी हासिल कर रहे हैं, जिससे न केवल स्थानीय बेरोजगार युवाओं को अवसर से वंचित किया जा रहा है, बल्कि शहर की सुरक्षा व्यवस्था भी कमजोर हो रही है। खुफिया एजेंसियों ने पाया कि ये घुसपैठिए मुख्य रूप से झुग्गी-झोपड़ियों और अवैध कॉलोनियों में रहते हैं, जहां से वे शहर के विभिन्न इलाकों में फैल गए हैं।
रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि यह घुसपैठ संगठित रूप से हो रही है, जिसमें कुछ ठेकेदारों की मिलीभगत शामिल है। इस खुलासे के बाद योगी आदित्यनाथ सरकार ने तत्काल कार्रवाई का आदेश जारी कर दिया है। नगर निगम के महापौर और अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि सभी सफाईकर्मियों का सत्यापन अभियान चलाया जाए। आधार कार्ड, वोटर आईडी और अन्य दस्तावेजों की जांच के साथ-साथ पुलिस और खुफिया विभाग की संयुक्त टीम गठित की गई है। यदि संदिग्ध पाए गए, तो उन्हें तत्काल नौकरी से हटाकर डिपोर्ट करने की प्रक्रिया शुरू होगी।
एलएमसी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, “हमारी प्राथमिकता सफाई व्यवस्था को बाधित किए बिना सत्यापन सुनिश्चित करना है। स्थानीय उम्मीदवारों को प्राथमिकता दी जाएगी।” यह मुद्दा लखनऊ के अलावा अन्य शहरों में भी फैल सकता है, जहां आउटसोर्सिंग मॉडल के तहत सफाई कार्य हो रहा है। विपक्षी दलों ने सरकार पर घुसपैठ रोकने में नाकामी का आरोप लगाया है, जबकि भाजपा नेताओं ने इसे ‘राष्ट्रीय सुरक्षा का सवाल’ बताते हुए कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह रिपोर्ट घुसपैठ की गहराई को उजागर करती है, जो सीमा सुरक्षा और रोजगार नीतियों पर पुनर्विचार की जरूरत बताती है। कुल मिलाकर, लखनऊ की साफ-सुथरी छवि पर यह दाग सुरक्षा चिंताओं को बढ़ा रहा है। सरकार की कार्रवाई से उम्मीद है कि जल्द ही स्थिति नियंत्रण में आ जाएगी, लेकिन सवाल यह है कि क्या यह सिर्फ शुरुआत है या व्यापक अभियान का हिस्सा?








