नई दिल्ली, 26 नवंबर 2025। Samvidhan Diwas: 26 नवंबर, संविधान दिवस के अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने देशवासियों को संविधान की भावना को जीवंत रखने और विकसित भारत के सपने को साकार करने का आह्वान किया। संसद के सेंट्रल हॉल में आयोजित समारोह को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि डॉ. भीमराव अम्बेडकर की अध्यक्षता में बनी यह संवैधानिक किताब न केवल कानून का दस्तावेज है, बल्कि भारत के करोड़ों लोगों के सपनों और आकांक्षाओं का जीवंत प्रतीक है।
राष्ट्रपति ने जोर देकर कहा, “विकसित भारत का संकल्प हम जरूर पूरा करेंगे। यह संकल्प केवल सरकार का नहीं, बल्कि 140 करोड़ भारतीयों का सामूहिक संकल्प है।” उन्होंने याद दिलाया कि जब संविधान लागू हुआ था, तब भारत एक गरीब, अशिक्षित और विभाजित देश था, लेकिन आज हम दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था हैं और 2047 तक तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की राह पर हैं। यह प्रगति संविधान की बदौलत ही संभव हुई है।

राष्ट्रपति मुर्मु ने विशेष रूप से महिलाओं, आदिवासियों और वंचित वर्गों की प्रगति पर गर्व जताया। उन्होंने कहा कि आज देश की राष्ट्रपति एक आदिवासी महिला है, यह अपने आप में संविधान की समावेशी शक्ति का सबसे बड़ा प्रमाण है। महिलाओं को संसद और विधानसभाओं में एक तिहाई आरक्षण देने वाला नारी शक्ति वंदन अधिनियम संविधान की 75वीं वर्षगांठ पर सबसे बड़ी भेंट है। संविधान दिवस के मौके पर राष्ट्रपति ने युवाओं से अपील की कि वे संविधान की प्रस्तावना को बार-बार पढ़ें और इसके मूल्यों – न्याय, स्वतंत्रता, समता और बंधुता – को अपने जीवन में उतारें।
उन्होंने चिंता जताई कि आज सोशल मीडिया पर अफवाहें और विभाजनकारी बातें तेजी से फैलती हैं, इसलिए हर नागरिक का दायित्व है कि वह संविधान प्रदत्त अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का उपयोग जिम्मेदारी से करे। राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि विकसित भारत तभी बनेगा जब गांव का अंतिम व्यक्ति सशक्त होगा। इसके लिए सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास जरूरी है।
उन्होंने आत्मनिर्भर भारत, डिजिटल इंडिया, स्टार्टअप इंडिया जैसी योजनाओं को संविधान की आत्मा से प्रेरित बताया। अंत में राष्ट्रपति मुर्मु ने विश्वास जताया कि जिस संविधान ने हमें आजादी के बाद एकजुट रखा, वही संविधान हमें विकसित राष्ट्र बनाने में सबसे बड़ी ताकत देगा। “आइए, हम सब मिलकर संविधान के सपनों को पूरा करें और भारत को विश्व गुरु बनाने का संकल्प दोहराएं,” यह कहते हुए उन्होंने अपना संबोधन समाप्त किया।








