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राजनाथ सिंह का उदयपुर में संदेश
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डिग्री के साथ संस्कार जरूरी, लाल किला ब्लास्ट का उदाहरण देकर जताई चिंता
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देश विरोधी गतिविधियों में शामिल हो रहे उच्च शिक्षित लोग
उदयपुर, 3 जनवरी 2026। Rajnath Singh Big Statement: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने राजस्थान के उदयपुर में भूपाल नोबल्स विश्वविद्यालय के 104वें स्थापना दिवस समारोह में हिस्सा लिया। इस मौके पर उन्होंने शिक्षा व्यवस्था की भूमिका पर गंभीर चिंता जताई और ‘व्हाइट कॉलर आतंकवाद’ जैसे उभरते खतरे की ओर ध्यान आकर्षित किया। सिंह ने कहा कि कोई भी शिक्षा प्रणाली सफल नहीं मानी जा सकती, जो ज्ञान के साथ-साथ विनम्रता, मजबूत चरित्र और नैतिक मूल्यों का विकास न करे।
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आज उच्च शिक्षित लोग भी आपराधिक और देश विरोधी गतिविधियों में शामिल हो रहे हैं, जो समाज के लिए गंभीर चुनौती है। राजनाथ सिंह ने चिंता जताते हुए कहा कि देश में ‘व्हाइट कॉलर आतंकवाद’ जैसा खतरनाक ट्रेंड सामने आ रहा है, जहां पढ़े-लिखे पेशेवर लोग समाज और राष्ट्र के खिलाफ काम कर रहे हैं।
उदाहरण देते हुए उन्होंने 10 नवंबर 2025 को दिल्ली के लाल किले के बाहर हुए कार बम धमाके का जिक्र किया। इस हमले में एक i20 कार में विस्फोट हुआ, जिसमें 15 लोग मारे गए और कई घायल हुए। कार को सुसाइड बॉम्बर डॉ. उमर-उन-नबी चला रहे थे, जो खुद एक डॉक्टर थे। जांच में एक ‘व्हाइट कॉलर टेरर मॉड्यूल’ का खुलासा हुआ, जिसमें तीन अन्य डॉक्टरों मुजम्मिल गनई, अदील राथर और शहीना सईद समेत कई लोगों को गिरफ्तार किया गया।
सिंह ने तंज कसते हुए कहा कि जिनके हाथों में पर्चे पर ‘Rx’ लिखना चाहिए था, उनके पास RDX मिला। यह शिक्षा में नैतिकता की कमी का परिणाम है। उन्होंने जोर दिया कि शिक्षा का लक्ष्य केवल डिग्री या नौकरी नहीं, बल्कि अच्छे संस्कार और मानवीय व्यक्तित्व का निर्माण होना चाहिए।
एआई और टेक्नोलॉजी का सही उपयोग जरूरी
रक्षा मंत्री ने तकनीक के सकारात्मक पक्ष पर भी बात की। उन्होंने कहा कि देश में कई डिफेंस स्टार्टअप बेहतरीन काम कर रहे हैं और अगले 15-20 सालों में भारत हथियारों के मामले में पूरी तरह आत्मनिर्भर हो जाएगा। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), मशीन लर्निंग जैसी टेक्नोलॉजी जीवन और कार्य को बदल रही हैं। इनका सही इस्तेमाल कर भारत अपने विकास को गति दे सकता है। सिंह ने आत्म-सम्मान और अहंकार के बीच की पतली रेखा को समझने की सलाह दी और कहा कि इसे पार नहीं करना चाहिए।
राजनाथ सिंह ने भारत की आर्थिक उपलब्धियों का जिक्र करते हुए कहा कि हम दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था हैं और 2030 तक तीसरी सबसे बड़ी बनने की राह पर हैं। इस सफर में विश्वविद्यालयों की बड़ी भूमिका है। शिक्षा केवल पेशेवर सफलता नहीं, बल्कि सामाजिक सद्भाव और नैतिकता को बढ़ावा देने वाली होनी चाहिए। उनका यह बयान आज के समय में बेहद प्रासंगिक है, जब शिक्षित वर्ग का एक हिस्सा गलत रास्ते पर जा रहा है।







