कर्नाटक, 2 जनवरी 2026। Rahul Gandhi: कर्नाटक में कांग्रेस की सरकार द्वारा कराए गए एक हालिया सर्वे ने इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) पर जनता के विश्वास को उजागर किया है। इस सर्वे में करीब 85% लोगों ने EVM को भरोसेमंद बताया है, जो विपक्षी नेता राहुल गांधी के ‘वोट चोरी’ और EVM पर सवाल उठाने वाले दावों के विपरीत है।
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भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने इस सर्वे को राहुल गांधी के चेहरे पर ‘करारा तमाचा’ बताते हुए उन्हें ‘झूठ फैलाने वाला’ करार दिया है। यह सर्वे कर्नाटक मॉनिटरिंग एंड इवैल्यूएशन अथॉरिटी द्वारा आयोजित किया गया था, जो राज्य के योजना विभाग के अधीन कार्य करता है। सर्वे का शीर्षक ‘लोकसभा चुनाव 2024 – नागरिकों के ज्ञान, रवैये और प्रैक्टिस (KAP) का एंडलाइन मूल्यांकन’ है। इसमें 5,100 लोगों से बात की गई, जो राज्य के 102 विधानसभा क्षेत्रों से चुने गए थे।
सर्वे बेंगलुरु, बेलगावी, कलबुर्गी और मैसूर जैसे चार प्रशासनिक डिवीजन में फैला था। नतीजों के मुताबिक, 84.55% लोगों का मानना है कि भारत में चुनाव निष्पक्ष और स्वतंत्र रूप से होते हैं। EVM पर भरोसा 2023 के 77.9% से बढ़कर 83.61% हो गया है। कलबुर्गी डिवीजन में सबसे ज्यादा 83.24% लोगों ने सहमति जताई, जबकि मैसूर में 70.67%। बेंगलुरु में भरोसा थोड़ा कम रहा, लेकिन कुल मिलाकर जनता का विश्वास मजबूत दिखा।
BJP के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने इस सर्वे को राहुल गांधी के दावों का ‘फैक्ट-चेक’ बताया। उन्होंने कहा, “राहुल गांधी जब कर्नाटक, तेलंगाना या हिमाचल में जीतते हैं तो चुनाव आयोग की तारीफ करते हैं, लेकिन हारने पर EVM को दोष देते हैं। दोष डेटा में नहीं, बेटे में है।” पूनावाला ने आरोप लगाया कि राहुल ‘प्रोपगैंडा के नेता’ हैं और जनता का विश्वास उनके झूठ को बेनकाब कर रहा है।
BJP नेता आर. अशोका ने भी X पर पोस्ट कर कहा कि यह सर्वे कांग्रेस के चेहरे पर थप्पड़ है, क्योंकि जनता लोकतंत्र पर भरोसा करती है, लेकिन कांग्रेस संदेह पैदा करती है। यह सर्वे ऐसे समय आया है जब राहुल गांधी EVM और चुनाव आयोग पर लगातार हमले कर रहे हैं। पिछले साल सितंबर में उन्होंने कर्नाटक चुनाव में वोटर लिस्ट से विरोधी समर्थकों को हटाने का आरोप लगाया था।
कर्नाटक के आईटी मंत्री प्रियांक खड़गे ने भी वोट डिलीशन का दावा किया था। हालांकि, अब कांग्रेस सरकार का अपना सर्वे इन दावों को खारिज करता नजर आ रहा है। दिलचस्प बात यह है कि इसी सरकार ने पंचायत और शहरी स्थानीय निकाय चुनावों में बैलट पेपर का इस्तेमाल करने का प्रस्ताव रखा है, जिसे BJP ने हार के डर से प्रेरित बताया है। यह मामला राजनीतिक बहस को तेज कर रहा है। जहां BJP इसे लोकतंत्र की जीत बता रही है, वहीं कांग्रेस चुप्पी साधे हुए है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे सर्वे चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता बढ़ाने में मदद करेंगे।
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