Home » धर्म » Pradosh Vrat 2025: दिसंबर में इस डेट को है प्रदोष, व्रत रखने से दूर होंगे सभी कष्ट

Pradosh Vrat 2025: दिसंबर में इस डेट को है प्रदोष, व्रत रखने से दूर होंगे सभी कष्ट

Share :

Pradosh Vrat 2025

Share :

नई दिल्ली, 29 नवंबर 2025। Pradosh Vrat 2025:  हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत को अत्यंत पुण्यदायी माना गया है। हर महीने शुक्ल और कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को पड़ने वाला यह व्रत भगवान शिव को समर्पित होता है। मान्यता है कि, प्रदोष काल (सूर्यास्त के आसपास का समय) में भोलेनाथ अपनी पत्नी माता पार्वती के साथ पृथ्वी पर भ्रमण करते हैं और भक्तों की मनोकामना पूर्ण करते हैं। दिसंबर 2025 में दो प्रदोष व्रत पड़ रहे हैं पहला 2 दिसंबर (मंगलवार) और दूसरा 17 दिसंबर (बुधवार) को।

इसे भी पढ़ें- Surya Puja: रविवार को ही क्यों की जाती है सूर्य देव की पूजा? जानिए पौराणिक कथा, वैज्ञानिक कारण और विशेष महत्व

2 दिसंबर 2025 – मार्गशीर्ष शुक्ल प्रदोष व्रत (मंगल प्रदोष)त्रयोदशी तिथि प्रारंभ: 2 दिसंबर दोपहर 03:57 बजे से।
त्रयोदशी तिथि समाप्त: 3 दिसंबर दोपहर 12:25 बजे तक।
प्रदोष पूजा मुहूर्त: शाम 05:33 से 08:15 बजे तक।
विशेष: मंगलवार को पड़ने से इसे “भौम प्रदोष व्रत” भी कहते हैं, जो कुंडली में मंगल दोष निवारण के लिए अचूक माना जाता है।

17 दिसंबर 2025 – पौष कृष्ण प्रदोष व्रत (बुध प्रदोष) त्रयोदशी तिथि प्रारंभ: 16 दिसंबर रात 11:57 बजे से।
त्रयोदशी तिथि समाप्त: 18 दिसंबर रात 02:32 बजे तक।
प्रदोष पूजा मुहूर्त: शाम 05:38 से 08:18 बजे तक।
विशेष: बुधवार को पड़ने से इसे “बुध प्रदोष” कहते हैं, जो संतान सुख, व्यापार में उन्नति और स्वास्थ्य लाभ के लिए उत्तम है।

प्रदोष व्रत की सरल पूजा विधि

सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें, सूर्य को जल अर्पित करें।
शिव मंदिर या घर में शिवलिंग के सामने व्रत का संकल्प लें।
संध्या समय स्नान कर शिवलिंग का गंगाजल, दूध, दही, घी, शहद, शक्कर से पंचामृत अभिषेक करें।
बेलपत्र, धतूरा, भांग, श्वेत पुष्प, चंदन, अक्षत, जनेऊ, मौली अर्पित करें।
“ॐ नमः शिवाय” या “ॐ त्र्यम्बकं यजामहे…” मंत्र का 108 बार जप करें।
शिव चालीसा, प्रदोष व्रत कथा का पाठ करें।
देसी घी का दीपक जलाएं, धूप-दीप से आरती करें।
फल, मिठाई, पंचमेवा का भोग लगाएं।
रात में चंद्रमा को अर्घ्य देकर ही फलाहार से व्रत खोलें।

प्रदोष व्रत के लाभ

सभी प्रकार के पापों का नाश
मनोकामना पूर्ति, धन-वैभव में वृद्धि
कुंडली के ग्रह दोषों का शमन
पारिवारिक सुख-शांति और संतान प्राप्ति
रोगों से मुक्ति और आयु वृद्धि

इस दिसंबर दोनों प्रदोष व्रत बहुत शुभ संयोग में आ रहे हैं। भक्त अभी से तैयारी शुरू कर दें ताकि भोलेनाथ की कृपा सदा बनी रहे। जय भोलेनाथ!

इसे भी पढ़ें- Radha Ashtami 2025: कब है व्रत? जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Advertisement
News Portal Development Services in Uttar Pradesh
Cricket Score
सबसे ज्यादा पड़ गई
Share Market

शहर चुनें

Follow Us