नई दिल्ली, 28 नवंबर 2025। Pollution Crisis: उत्तर भारत में सर्दियों की दस्तक के साथ ही वायु प्रदूषण ने एक बार फिर जानलेवा रूप धारण कर लिया है। दिल्ली का AQI 400 से ऊपर पहुंच चुका है, जिससे स्कूल बंद हो गए हैं, मास्क अनिवार्य हो गया है और लोग घरों में कैद होकर सांस लेने को तरस रहे हैं। इसी संकट के बीच आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक और पूर्व दिल्ली मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने केंद्र की भाजपा सरकार पर जमकर जुबानी हमला बोला है।
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उन्होंने कहा कि जहरीली हवा से छुटकारा दिलाने के बजाय केंद्र सरकार एयर और वॉटर प्यूरीफायर जैसे जरूरी उपकरणों पर जीएसटी वसूलकर जनता की जेब काट रही है। शुक्रवार को एक्स पर पोस्ट के जरिए केजरीवाल ने केंद्र सरकार को कटघरे में खड़ा किया। उन्होंने लिखा, “साफ हवा और साफ पानी हर नागरिक का बुनियादी अधिकार है। दिल्ली सहित उत्तर भारत में हवा जानलेवा हो चुकी है, और समाधान देने की बजाय सरकार जनता से टैक्स वसूल रही है। लोग अपने परिवार की सेहत बचाने के लिए एयर प्यूरीफायर खरीदना चाहते हैं, लेकिन 18-28 प्रतिशत जीएसटी की मार झेल रहे हैं।
केंद्र सरकार को तुरंत इन उपकरणों पर जीएसटी हटाना चाहिए।” केजरीवाल ने जोर देकर कहा कि यह टैक्स वसूली न केवल अमानवीय है, बल्कि प्रदूषण संकट से निपटने में सरकार की लापरवाही को उजागर करती है। केजरीवाल का यह बयान दिल्ली-एनसीआर में छाए धुंधलके के बीच आया है, जहां सड़कें वीरान हो गई हैं और स्वास्थ्य विशेषज्ञ सांस की बीमारियों में वृद्धि की चेतावनी दे रहे हैं।
उन्होंने याद दिलाया कि उनकी सरकार ने दिल्ली में प्रदूषण नियंत्रण के लिए ऑड-ईवन, कंस्ट्रक्शन बैन और ग्रीन बॉन्ड जैसे कदम उठाए थे, लेकिन केंद्र का सहयोग हमेशा अपर्याप्त रहा। अब विपक्ष में रहते हुए भी केजरीवाल ने केंद्र से मांग की है कि जीएसटी छूट के साथ ही पराली जलाने पर पंजाब-हरियाणा को वैकल्पिक समाधान प्रदान किया जाए। इस बीच, कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी संसद में प्रदूषण पर चर्चा की मांग उठाई है।
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए कहा, “मोदी जी, भारत के बच्चों का दम घुट रहा है, आप चुप कैसे रह सकते हैं?” राहुल ने एक एक्शन प्लान बनाने की अपील की, जिसमें पड़ोसी राज्यों के साथ समन्वय और ठोस नीतियां शामिल हों। भाजपा ने केजरीवाल के बयान को राजनीतिक स्टंट बताते हुए पलटवार किया है। पार्टी प्रवक्ता ने कहा कि केंद्र ने ईस्टर्न और वेस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे जैसे इंफ्रास्ट्रक्चर से प्रदूषण कम करने में मदद की है, जबकि केजरीवाल सरकार ने पर्यावरण सेस के 1,200 करोड़ रुपये का दुरुपयोग किया।
विपक्ष के इस हमले से राजनीतिक तापमान बढ़ गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि प्रदूषण अब मौसमी समस्या नहीं, बल्कि राष्ट्रीय संकट बन चुका है। केजरीवाल की मांग पर केंद्र का क्या जवाब आता है, यह देखना दिलचस्प होगा। फिलहाल, दिल्लीवासी जहरीली हवा से जूझते हुए राहत की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
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