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Poison In The Air: पिछले दस सालों में दिवाली पर दिल्ली-एनसीआर का AQI कितना घातक रहा?

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Poison In The Air

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नई दिल्ली, 16 अक्टूबर 2025। Poison In The Air: दिल्ली-एनसीआर में हर साल दिवाली का उत्साह पटाखों की चमक-दमक के साथ आता है, लेकिन इसके साथ ही हवा में घुलता जहर पूरे क्षेत्र को सांसत में डाल देता है। पिछले दस वर्षों (2015-2024) में दिवाली और उसके अगले दिन का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) ज्यादातर ‘बहुत खराब’ से ‘गंभीर’ श्रेणी में रहा, जो स्वास्थ्य के लिए घातक साबित हुआ।

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सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (CPCB) के आंकड़ों के अनुसार, इस दौरान PM2.5 और PM10 जैसे प्रदूषकों का स्तर कई गुना बढ़ जाता है, जिससे सांस की बीमारियां, हृदय रोग और कैंसर का खतरा बढ़ जाता है। आइए, वर्षवार नजर डालें कि कैसे यह समस्या बनी रही।

2015 में दिवाली (11 नवंबर) पर AQI 342 दर्ज किया गया, जो अगले दिन 360 हो गया। दोनों ‘बहुत खराब’। 2016 (30 अक्टूबर) में पटाखों ने हालात बिगाड़ दिए। दिवाली पर 431 और अगले दिन 445 AQI ने ‘गंभीर’ स्तर को छुआ। 2017 (19 अक्टूबर) थोड़ा बेहतर रहा, लेकिन 319 से 403 तक पहुंचा। 2018 (7 नवंबर) पर 281 AQI के बावजूद अगला दिन 390 पर आ गया।

2019 (27 अक्टूबर) में 337 से 368, जबकि 2020 (14 नवंबर) महामारी के बीच 414 से 435 तक बिगड़ा। 2021 (4 नवंबर) सबसे खराब रहा 382 से 462, जब लॉकडाउन के बावजूद स्टबल बर्निंग ने आग में घी डाला। 2022 (24 अक्टूबर) में सख्ती से सुधार दिखा। दिवाली पर 312-346 और अगले दिन 335 AQI ‘बहुत खराब’ रहा, जो 2015 के बाद सबसे साफ था, लेकिन 2023 (12 नवंबर) में फिर उछाल आया और 218 पर शुरू होकर अगले दिन 358 पर पहुंच गया।

साल 2024 (31 अक्टूबर) में रात 12 बजे AQI 806 तक पहुंचा, लेकिन 24 घंटे औसत 394 रहा, जो अगले दिन 339 पर आया। ये आंकड़े बताते हैं कि औसतन दिवाली पर AQI 300-400 के बीच रहता है, जो WHO मानकों से 10-20 गुना ज्यादा है। पटाखे 30-40% प्रदूषण बढ़ाते हैं, ऊपर से पराली जलाना और वाहनों का धुआं।

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विशेषज्ञों का कहना है कि हवा की गति और तापमान सुधार ला सकते हैं, जैसा 2024 में हुआ। फिर भी, GRAP (Graded Response Action Plan) के तहत प्रतिबंधों का पालन कमजोर रहा। सरकार ने ग्रीन पटाखों को बढ़ावा दिया, लेकिन जागरूकता की कमी से मुश्किल आ रही है। दिल्लीवासियों के लिए यह चेतावनी है के दीवाली की ख़ुशी में हवा को जहरीला न बनाएं। मास्क पहनें, घर पर रहें और प्रदूषण घटाने के लिए पौधारोपण करें। अगर यूं ही चला तो आने वाले साल और बुरे हो सकते हैं। साफ हवा का अधिकार मौलिक है, इसे बचाना हमारी जिम्मेदारी।

 

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