लखनऊ, 24 अक्टूबर 2025। उत्तर प्रदेश के आवास एवं शहरी नियोजन विभाग ने ‘नई शहरी पुनर्विकास नीति 2025’ का मसौदा तैयार कर लिया है। इस नीति के तहत लखनऊ सहित प्रदेश के प्रमुख महानगरों में 25 वर्ष या इससे अधिक पुरानी जर्जर इमारतों को ध्वस्त कर अधिक ऊंचाई वाले आधुनिक अपार्टमेंट कॉम्प्लेक्स बनाए जा सकेंगे। सूत्रों के अनुसार, यह नीति शीघ्र ही अमल में लाई जाएगी, जिससे आवासीय संकट के साथ-साथ औद्योगिक क्षेत्रों के लिए भूमि की कमी भी काफी हद तक दूर हो सकेगी।
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नीति का मुख्य उद्देश्य महानगरों के घनी आबादी वाले इलाकों में बिखरी पुरानी बस्तियों और खाली पड़ी जमीनों का इष्टतम उपयोग सुनिश्चित करना है। इसके तहत प्रस्तावित परियोजनाओं को ‘उत्तर प्रदेश भवन निर्माण उपनियम-2025’ के अनुरूप त्वरित अनुमति मिलेगी। इससे पुरानी कॉलोनियों में रहवासियों को किफायती दरों पर न केवल आवास, बल्कि व्यावसायिक और सामुदायिक सुविधाएं भी उपलब्ध कराना सरल हो जाएगा।
नीति के प्रावधानों के अनुसार, किसी पुरानी इमारत को पुनर्विकासित करने के लिए उसके दो-तिहाई निवासियों की सहमति अनिवार्य होगी। उसके बाद कार्यान्वयन एजेंसी को विकास प्राधिकरण या आवास विकास परिषद जैसे सरकारी निकायों से विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन (डीपीआर) अनुमोदित कराना होगा। निर्माण कार्य को ध्वस्तीकरण के पांच वर्ष के भीतर पूरा करना होगा, जिसमें कार्यान्वयन एजेंसी को प्रारंभिक तीन वर्ष का समय दिया जाएगा। यदि आवश्यक हो, तो दो वर्ष का अतिरिक्त विस्तार भी प्राप्त किया जा सकेगा।
प्रोत्साहन के रूप में, कार्यान्वयन एजेंसी को विकास शुल्क में 50 प्रतिशत, भूमि उपयोग परिवर्तन शुल्क तथा प्रभाव शुल्क में 25-25 प्रतिशत की छूट प्रदान की जाएगी। निर्माण प्रक्रिया आरंभ होने से पूर्व, परियोजना प्रबंधक, हाउसिंग सोसाइटी, रेसिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन (आरडब्ल्यूए) और कार्यान्वयन एजेंसी के बीच एक समझौता पत्र (एग्रीमेंट) तैयार किया जाएगा। इस एग्रीमेंट के अंतर्गत, नई इमारत पूरी होने तक पुराने निवासियों को किराया भुगतान सुनिश्चित होगा। यदि कोई पक्ष शर्तों का उल्लंघन करता है, तो जुर्माना लगाने से लेकर समझौता रद्द करने तक की कार्रवाई की जा सकेगी।
प्रदेश के महानगरों, विशेषकर लखनऊ में, 1,500 वर्ग मीटर से अधिक क्षेत्र वाली 2-4 मंजिला पुरानी कॉलोनियां आम हैं, जो 25 वर्ष से अधिक पुरानी हो चुकी हैं और जीर्ण-शीर्ण अवस्था में हैं। इनमें मालिकाना हक की अनुपस्थिति के कारण विकास प्राधिकरण इन्हें हटाकर पुनर्निर्माण नहीं कर पाते, जबकि निवासियों को अन्यत्र विस्थापित करना भी व्यावहारिक नहीं। नई नीति इन चुनौतियों का समाधान प्रदान करेगी। इसके तहत ऐसी कॉलोनियों को 10-15 मंजिला अपार्टमेंट्स में परिवर्तित किया जा सकेगा।
पुराने भवनों के मालिकों को बिना अतिरिक्त शुल्क के समकक्ष नए फ्लैट प्राप्त होंगे, जबकि अतिरिक्त फ्लैट्स की बिक्री से डेवलपर परियोजना की लागत व लाभ अर्जित करेगा।यह नीति न केवल शहरीकरण को गति देगी, बल्कि सतत विकास को बढ़ावा भी प्रदान करेगी। लखनऊ जैसे तेजी से बढ़ते शहरों में यह एक क्रांतिकारी कदम साबित हो सकती है, जहां भूमि की कमी एक बड़ी समस्या बनी हुई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इससे न केवल आवास आपूर्ति बढ़ेगी, बल्कि पर्यावरण-अनुकूल निर्माण मानकों का पालन भी सुनिश्चित होगा। कुल मिलाकर, ‘नई शहरी पुनर्विकास नीति 2025’ उत्तर प्रदेश को एक आधुनिक, रहने योग्य महानगरों का हब बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान देगी।
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