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PAM Disease: केरल में ‘ब्रेन-ईटिंग अमीबा’ का कहर, 170 संक्रमित, 42 की मौत, पश्चिम बंगाल में भी दस्तक

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PAM Disease

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कोझीकोड/नई दिल्ली, 9 दिसंबर 2025। PAM Disease: केरल में प्राइमरी अमीबिक मेनिंगोएन्सेफलाइटिस (PAM) यानी ‘ब्रेन-ईटिंग अमीबा’ का संक्रमण भयावह रूप ले चुका है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के ताज़ा आंकड़ों के अनुसार, साल 2025 में अब तक केरल में इस खतरनाक परजीवी से 170 लोग संक्रमित हो चुके हैं, जिनमें से 42 की दर्दनाक मौत हो गई। सबसे चिंताजनक बात यह है कि हाल के महीनों में पश्चिम बंगाल में भी इसके मामले सामने आने लगे हैं।

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नेगलेरिया फाउलेरी: मिनटों में दिमाग को खा जाने वाला परजीवी। यह संक्रमण नेगलेरिया फाउलेरी (Naegleria fowleri) नामक एकल-कोशिकीय परजीवी के कारण होता है, जो गर्म और स्थिर मीठे पानी (तालाब, झील, नहर, गर्म झरने) में पनपता है। जब कोई व्यक्ति नहाते, तैरते या डाइविंग करते समय दूषित पानी नाक के रास्ते अंदर खींच लेता है, तो यह अमीबा नाक की झिल्ली से होते हुए सीधे दिमाग में पहुंच जाता है।

वहां यह मस्तिष्क के ऊतकों को तेजी से नष्ट करने लगता है। एक बार लक्षण दिखाई देने के बाद मरीज की मौत 95-98% मामलों में तय मानी जाती है। अच्छी बात यह है कि यह बीमारी एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में नहीं फैलती।

साल-दर-साल बढ़ते मामले

2023: केवल 2 मामले, दोनों की मौत
2024: 39 मामले, 9 मौतें
2025 (दिसंबर तक): 170 मामले, 42 मौतें

सितंबर 2025 तक दुनिया भर में कुल रिकॉर्डेड PAM केस लगभग 500 थे, लेकिन अकेले केरल ने 2024-25 में ही 200 से ज्यादा मामले रिपोर्ट कर पूरी दुनिया को चौंका दिया है।शुरुआती लक्षण जिन्हें नजरअंदाज करना पड़ सकता है भारी।

तेज सिरदर्द
बुखार और उल्टी
गर्दन में अकड़न
भ्रम की स्थिति, चेतना खोना
दौरे पड़ना

ये लक्षण सामान्य मेनिनजाइटिस जैसे लगते हैं, इसलिए ज्यादातर मरीज देर से अस्पताल पहुंचते हैं।

सरकार और स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई

कोझीकोड स्थित नेशनल सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल (NCDC) ने विस्तृत अध्ययन शुरू किया।
ICMR और ICAR संयुक्त रूप से जल स्रोतों की मॉनिटरिंग कर रहे हैं।
देश में 18 वायरोलॉजी लैब्स में PAM की टेस्टिंग सुविधा उपलब्ध।
केरल और पश्चिम बंगाल सरकार को लोगों को गर्म पानी में नहाने से बचने की सलाह जारी।
क्लोरीन युक्त पानी का उपयोग और नाक में क्लिप लगाकर तैरने की अपील।

डॉक्टरों का कहना है कि अभी तक इसका कोई पक्का इलाज नहीं है। मिल्तेफोसिन दवा से कुछ मरीज बचाए गए हैं, लेकिन सफलता दर बेहद कम है।

बचाव ही एकमात्र उपाय

गर्मियों में स्थिर मीठे पानी में नहाने से बचें
स्विमिंग पूल में पर्याप्त क्लोरीन सुनिश्चित करें
तैरते समय नाक में क्लिप लगाएं
उबालकर ठंडा किया हुआ या फिल्टर्ड पानी ही नाक सफाई के लिए इस्तेमाल करें

केरल के बाद पश्चिम बंगाल में भी मामले सामने आने से स्वास्थ्य विशेषज्ञ जलवायु परिवर्तन और बढ़ते तापमान को इसका बड़ा कारण बता रहे हैं। अगर सावधानी नहीं बरती गई तो आने वाले सालों में यह बीमारी और राज्यों में पैर पसार सकती है।

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