लखनऊ, 11 दिसंबर 2025। Om Prakash Rajbhar RSS: उत्तर प्रदेश की सियासत में एक बार फिर सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर सुर्खियों में हैं। राजभर ने अपनी पार्टी के लिए ‘राष्ट्रीय सुहेलदेव सेना’ (आरएसएस) का गठन किया है, जो नाम से ही विवादों को जन्म दे रहा है। यह आरएसएस राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ नहीं, बल्कि ‘राष्ट्रीय सुहेलदेव सेना’ का संक्षिप्त रूप है।
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सेना के कार्यकर्ताओं को नीली वर्दी, कंधों पर रैंक के अनुसार सितारे, छाती पर बैज, बेरेट कैप और हाथों में पीली डंडी दी गई है। पदनाम भी पुलिसिया अंदाज में हैं – कमांडर, सीओ, डीएसपी, एसआई, इंस्पेक्टर आदि।यह सेना महाराजा सुहेलदेव के आदर्शों पर आधारित बताई जा रही है। राजभर का दावा है कि इसका मकसद ग्रामीण युवाओं को गुमराह होने से बचाना और उनकी क्षमता का विकास करना है।

उन्होंने कहा, “पहले हमारे युवा गमछा और पीली टी-शर्ट पहनकर काम करते थे। अब हमने इसे आधिकारिक रूप दिया है। सभी को पार्टी की ओर से आई-कार्ड जारी किए जा रहे हैं।” पार्टी महासचिव अरुण राजभर ने भी कहा कि युवाओं को गलत रास्ते पर जाने से रोकने और सही दिशा देने के लिए यह सेना बनी है।
सेना की शुरुआत अभी 22 जिलों में की गई है, मुख्य रूप से पूर्वांचल में। राजभर ने लक्ष्य रखा है कि पूरे प्रदेश में विस्तार होगा और एक लाख युवाओं को इसमें शामिल किया जाएगा। आयु सीमा 18 से 25 वर्ष रखी गई है। युवाओं को कौशल विकास की ट्रेनिंग दी जाएगी, ताकि वे भविष्य को लेकर संशय में न रहें। हाल ही में आजमगढ़ में वर्दी वितरण कार्यक्रम हुआ, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।
यह कदम 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले उठाया गया है, जिससे सियासी गलियारों में चर्चा तेज है। एनडीए सहयोगी होने के बावजूद राजभर का यह संगठन अपनी अलग पहचान बना रहा है। विपक्ष इसे सियासी स्टंट बता सकता है, जबकि राजभर इसे समाज सेवा का माध्यम मानते हैं। फिलहाल भाजपा या मूल आरएसएस की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन नाम की समानता से विवाद की आशंका जताई जा रही है।
राजभर की यह पहल उनकी पार्टी को मजबूत करने और राजभर समाज के युवाओं को एकजुट करने की रणनीति मानी जा रही है। पूर्वांचल में सुभास्पा का प्रभाव बढ़ाने का यह नया तरीका यूपी की राजनीति को नई दिशा दे सकता है।
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