मुंबई, 7 अक्टूबर 2025। Notice to Anil Ambani: भारतीय उद्योगपति अनिल अंबानी को एक और बड़ा झटका लगा है। सेबी (सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया) ने उनकी अगुवाई वाली दो प्रमुख कंपनियों रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर (रिल इंफ्रा) और रिलायंस पावर को शो-कॉज नोटिस जारी किया है। ये नोटिस कथित धोखाधड़ीपूर्ण प्रथाओं और फंड डायवर्जन से जुड़े उल्लंघनों के लिए दिए गए हैं, जो सीएलई प्राइवेट लिमिटेड के साथ संबंधित हैं।
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यह मामला अनिल अंबानी की कंपनियों के लिए नया सिरदर्द पैदा कर रहा है, जहां पहले से ही कर्ज और रेगुलेटरी चुनौतियां बरकरार हैं। सेबी के अनुसार, रिल इंफ्रा और रिलायंस पावर ने सीएलई प्राइवेट के साथ लेन-देन में अनियमितताएं कीं, जिसमें फंड्स का अनधिकृत स्थानांतरण शामिल है। रिल इंफ्रा ने नोटिस का खंडन करते हुए कहा कि कंपनी का सीएलई के साथ नेट एक्सपोजर 6,500 करोड़ रुपये था, जो पूरी तरह से वैध था।
कंपनी का दावा है कि सेटलमेंट प्रक्रिया पूरी हो चुकी थी, फिर भी आठ महीने की देरी के बाद यह नोटिस आया। इसके बावजूद, शेयर बाजार में दोनों कंपनियों के स्टॉक में गिरावट दर्ज की गई। रिलायंस पावर के शेयर 5% से अधिक लुढ़क गए, जबकि रिल इंफ्रा के शेयरों में 3-4% की कमजोरी दिखी। यह घटना अनिल अंबानी के साम्राज्य के लिए एक और झटके के रूप में सामने आई है, जो पहले से ही यस बैंक निवेश मामले में सेबी की सेटलमेंट याचिका को खारिज कर चुकी है।
अगस्त 2025 में सेबी ने यस बैंक से जुड़े आरोपों पर अनिल अंबानी की सेटलमेंट अपील को ठुकरा दिया था, जहां अनियमित निवेश के आरोप लगे थे। इसके अलावा, रिलायंस कम्युनिकेशंस (आरकॉम) पर एसबीआई ने फ्रॉड टैग लगाने का फैसला किया है, जिसके खिलाफ हाईकोर्ट ने याचिका खारिज कर दी। ये सभी मामले अनिल अंबानी की कंपनियों को बैंकों और रेगुलेटर्स के निशाने पर ला रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि ये नोटिस कंपनियों की वित्तीय स्थिरता पर सवाल खड़े कर सकते हैं। रिलायंस ग्रुप ने कर्ज चुकाने के लिए संपत्ति बेचीं और पुनर्गठन किया, लेकिन रेगुलेटरी जांचें लगातार बाधा बन रही हैं। सेबी अब कंपनियों से जवाब मांग रही है, और सुनवाई के बाद आगे की कार्रवाई तय होगी। यदि आरोप साबित हुए, तो जुर्माना या प्रतिबंध लग सकता है। अनिल अंबानी, जो एक समय भारत के सबसे अमीरों में शुमार थे, अब कर्ज के जाल में फंसे हैं। उनकी कंपनियां ऊर्जा, इंफ्रास्ट्रक्चर और टेलीकॉम क्षेत्रों में सक्रिय हैं, लेकिन लगातार चुनौतियां उन्हें पीछे धकेल रही हैं।
यह मामला भारतीय कॉर्पोरेट जगत में पारदर्शिता और शासन की महत्ता को रेखांकित करता है। निवेशकों को सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है, क्योंकि रिलायंस ग्रुप के स्टॉक अस्थिर बने रहेंगे। कुल मिलाकर, अनिल अंबानी को इस झटके से उबरना होगा, वरना उनकी साम्राज्य पर और खतरा मंडरा सकता है।
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