नई दिल्ली, 11 दिसंबर 2025। Noida Authority Scam: सुप्रीम कोर्ट ने नोएडा अथॉरिटी में जमीन अधिग्रहण के नाम पर करोड़ों रुपये के कथित अतिरिक्त मुआवजे के मामले में जांच का दायरा बेहद व्यापक कर दिया है। बुधवार को चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन जजों की बेंच ने स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) को पिछले 15 वर्षों में नोएडा अथॉरिटी के सभी मुख्य कार्यपालक अधिकारियों (CEO), अतिरिक्त मुख्य कार्यपालक अधिकारियों, एस्टीट ऑफिसर और लॉ ऑफिसरों की व्यक्तिगत एवं परिवार की संपत्ति की गहन जांच करने का सख्त निर्देश दिया।
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कोर्ट ने SIT की पिछली रिपोर्ट को स्वीकार करते हुए जांच पूरी करने के लिए दो महीने का अतिरिक्त समय दिया। SIT ने अपनी रिपोर्ट में खुलासा किया था कि कम से कम 20 मामलों में अधिकारियों की मिलीभगत से कुछ चुनिंदा जमीन मालिकों को तय दर से कई गुना ज्यादा मुआवजा दिलवाया गया। साथ ही अथॉरिटी की जमीन आवंटन नीति बिल्डर लॉबी के पक्ष में बनाई गई थी और सारे अहम अधिकार कुछ गिने-चुने अधिकारियों के हाथ में केंद्रित थे।
कामकाज में पारदर्शिता और जवाबदेही का पूरी तरह अभाव था। सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा, “हमें यह जानना है कि क्या नोएडा अथॉरिटी के अधिकारियों और लाभार्थी जमीन मालिकों के बीच कोई आपराधिक सांठ-गांठ थी।” कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि एक तरफ कई किसानों को उनकी जमीन का उचित मुआवजा तक नहीं मिला, वहीं दूसरी तरफ चुनिंदा लोगों को अरबों का फायदा पहुंचाया गया।
बिल्डरों को मनमानी छूट, घर खरीदार बेबस
SIT ने यह भी उजागर किया कि कई बिल्डरों को उनकी वित्तीय स्थिति और पिछले ट्रैक रिकॉर्ड की बिना जांच किए बड़े-बड़े प्रोजेक्ट आवंटित कर दिए गए। नतीजा – हजारों फ्लैट खरीदार आज भी अपने घर के लिए तरस रहे हैं। कोर्ट ने इस पहलू पर भी गहरी नाराजगी जताई।
यूपी सरकार को बड़ा निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना एक्सप्रेस-वे अथॉरिटी को मेट्रोपॉलिटन डेवलपमेंट काउंसिल में बदलने पर गंभीरता से विचार करने को कहा है, ताकि सत्ता का दुरुपयोग रोका जा सके और निर्णय प्रक्रिया में जन-भागीदारी बढ़े। फिलहाल यूपी पुलिस ने इस मामले में 12 FIR दर्ज की हैं और कई अधिकारियों के खिलाफ। लेकिन सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में चल रही SIT जांच से अब तक के सबसे बड़े अधिकारियों तक शिकंजा कसने की उम्मीद है।
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