वेनेजुएला, 11 अक्टूबर 2025। Nobel Peace Prize: वेनेजुएला की प्रमुख विपक्षी नेता मारिया कोरिना मचाडो को 2025 का नोबेल शांति पुरस्कार मिला है, लेकिन यह सम्मान अब वैश्विक विवादों का केंद्र बन चुका है। नॉर्वेजियन नोबेल कमिटी ने मचाडो को तानाशाही से लोकतंत्र की ओर शांतिपूर्ण संक्रमण के लिए यह पुरस्कार दिया, जहां उन्होंने विपक्ष को एकजुट कर फ्री इलेक्शन और नागरिक अधिकारों की मांग की।
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58 वर्षीय इंडस्ट्रियल इंजीनियर मचाडो वेनेजुएला में छिपकर रह रही हैं, क्योंकि राष्ट्रपति निकोलस मादुरो के खिलाफ उनकी मुखरता ने उनकी जान को खतरे में डाल दिया है। 2024 के विवादास्पद चुनावों में मचाडो को उम्मीदवारी से वंचित कर दिया गया, फिर भी उन्होंने विपक्षी उम्मीदवार एडमंडो गोंजालेज को समर्थन दिया। विपक्ष का दावा है कि मादुरो की जीत फर्जी थी, जिसके बाद दमनकारी कार्रवाई हुई।
मचाडो ने पुरस्कार को वेनेजुएलावासियों के संघर्ष का सम्मान बताते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को समर्पित किया, जिनकी ‘निर्णायक सहायता’ का आभार जताया। लेकिन यही कदम विवादों को हवा दे रहा है। आलोचक उन्हें यूएस राइट-विंग हितों और यूरोपीय कंसर्वेटिव आंदोलनों से जोड़ते हैं। अमेरिकी मुस्लिम सिविल राइट्स ग्रुप काउंसिल ऑन अमेरिकन-इस्लामिक रिलेशंस (CAIR) ने फैसले को ‘अनुचित’ बताते हुए पुरस्कार रद्द करने की मांग की, क्योंकि मचाडो इजराइल की लिकुड पार्टी का समर्थन करती हैं, जिसे वे ‘नस्लवादी’ मानते हैं।
स्पेन के पूर्व उप-राष्ट्रपति पाब्लो इग्लेसियास ने सोशल मीडिया पर तंज कसा कि यह पुरस्कार ट्रंप या हिटलर को देने जैसा है, और मचाडो को कूप प्रयासों की साजिशकर्ता बताया। वेनेजुएला की सत्ताधारी पार्टी के सदस्यों ने इसे ‘शर्मनाक’ करार दिया, आरोप लगाया कि मचाडो विदेशी ताकतों से मिलकर अस्थिरता फैला रही हैं। विवाद की जड़ें गहरी हैं। मचाडो पर 2002 के कूप में भूमिका और 2014 के ‘ला सलिडा’ अभियान में हिंसा भड़काने का आरोप है, जहां बैरिकेड्स, बसों में आगजनी और एम्बुलेंस पर हमले हुए।
वे यूएस सैंक्शंस का समर्थन करती हैं, जो भोजन, दवा और ऊर्जा की आपूर्ति रोककर लाखों को प्रभावित कर रहे हैं। इजराइल के फार-राइट पीएम बेंजामिन नेतन्याहू से सहयोग मांगना और यूरोपीय दक्षिणपंथियों जैसे गर्ट विल्डर्स व मरीन ले पेन के साथ ‘रिकॉनक्विस्टा’ का जिक्र करना एंटी-मुस्लिम फासीवाद के रूप में देखा जा रहा है। ट्रंप की इनवेजन धमकियों का समर्थन और वेनेजुएला को ‘बमों से मुक्त’ करने की अपील ने उन्हें ‘विदेशी हस्तक्षेप की कठपुतली’ बना दिया।हालांकि, नोबेल फाउंडेशन के नियमों के तहत पुरस्कार एक बार दिया गया तो रद्द नहीं हो सकता।
कमिटी चेयर जोरगेन वाट्ने फ्राइडनेस ने मचाडो की ‘नागरिक साहस’ की सराहना की, जबकि यूएन महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने उन्हें लोकतंत्र की चैंपियन बताया। वेनेजुएला में लाखों उनके समर्थक हैं, जो इसे दमन के खिलाफ जीत मानते हैं। लेकिन वैश्विक स्तर पर यह पुरस्कार शांति की बजाय भू-राजनीतिक संघर्षों का प्रतीक बन गया है। क्या यह मचाडो की लोकतांत्रिक लड़ाई को मजबूत करेगा या वेनेजुएला के संकट को और गहरा? समय बताएगा।
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