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New Labour Code: नए लेबर कोड में हड़ताल अब इतनी आसान नहीं, 60 दिन पहले देना होगा नोटिस

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New Labour Code

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नई दिल्ली, 26 नवंबर 2025। New Labour Code: केंद्र सरकार द्वारा लागू किए जा रहे चार नए श्रम संहिताओं (Labour Codes) ने कर्मचारियों की हड़ताल करने की आजादी पर बड़ा ब्रेक लगा दिया है। अब कोई भी कर्मचारी या यूनियन बिना पूर्व सूचना के अचानक हड़ताल (Flash Strike) पर नहीं जा सकेगा। नए नियमों के तहत हड़ताल शुरू करने से पूरे 60 दिन पहले लिखित नोटिस देना अनिवार्य होगा। अगर बिना नोटिस हड़ताल की गई तो उसे अवैध माना जाएगा और इसके लिए भारी जुर्माना एवं जेल की सजा तक हो सकती है। नए श्रम संहिता – औद्योगिक संबंध संहिता 2020 (Industrial Relations Code) में यह प्रावधान सबसे सख्त है। इसके अनुसार हड़ताल का नोटिस कम से कम 60 दिन पहले देना होगा।

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  • नोटिस देने के बाद भी 14 दिन तक हड़ताल नहीं की जा सकती (कूलिंग पीरियड)।
  • समझौता वार्ता (Conciliation) चल रही हो, तो उस दौरान हड़ताल पूरी तरह प्रतिबंधित।
  • आवश्यक सेवाओं (Essential Services) में तो 6 महीने पहले नोटिस और सरकार की अनुमति जरूरी।
  • अगर कोई कर्मचारी या यूनियन इन नियमों का उल्लंघन करता है तो, हड़ताल में शामिल कर्मचारियों का उस दिन का वेतन कट सकता है।
  • यूनियन या कर्मचारी पर 50,000 रुपये तक जुर्माना।
  • बार-बार उल्लंघन पर 2 साल तक की जेल और 2 लाख तक जुर्माना।

सरकार का तर्क है कि, अचानक हड़ताल से उद्योग-धंधों को भारी नुकसान होता है, उत्पादन रुकता है और अर्थव्यवस्था प्रभावित होती है, इसलिए संतुलित व्यवस्था की जरूरत थी। दूसरी तरफ ट्रेड यूनियंस इसे “कर्मचारी अधिकारों पर हमला” बता रही हैं। उनका कहना है कि, पहले 14 दिन का नोटिस ही काफी था, अब 60 दिन का प्रावधान हड़ताल को लगभग असंभव बना देगा। नए कोड में कुछ और बड़े बदलाव भी हैं, 300 से कम कर्मचारियों वाली कंपनी अब बिना सरकार की अनुमति के कर्मचारी निकाल सकती है (पहले 100 कर्मचारियों की सीमा थी)।

  • फिक्स्ड टर्म एम्प्लॉयमेंट को बढ़ावा, जिससे कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों की संख्या बढ़ेगी।
  • सभी कर्मचारियों को साल में एक बार फ्री मेडिकल चेकअप अनिवार्य।
  • सोशल सिक्योरिटी फंड बनेगा, जिसमें गिग वर्कर्स और प्लेटफॉर्म वर्कर्स भी शामिल होंगे।

केंद्र सरकार ने दावा किया है कि, ये कोड “ईज ऑफ डूइंग बिजनेस” के साथ-साथ कर्मचारियों को अधिक सुरक्षा और फायदा देंगे, लेकिन ज्यादातर केंद्रीय ट्रेड यूनियनों ने इन्हें “कंपनी हितैषी और मजदूर विरोधी” बताया है और पूरे देश में विरोध प्रदर्शन कर रही हैं। फिलहाल चारों लेबर कोड के नियम अभी सभी राज्यों में पूरी तरह लागू नहीं हुए हैं, लेकिन जैसे-जैसे राज्य अपने नियम बनाएंगे, हड़ताल करना वाकई बेहद मुश्किल हो जाएगा।

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