नई दिल्ली 15 दिसंबर 2025। Nazar Teeka in Astrology: भारतीय संस्कृति में नजर टीका या काला टीका लगाने की परंपरा सदियों पुरानी है। यह मुख्य रूप से बच्चों और नवजात शिशुओं पर बुरी नजर (ईविल आई) से बचाव के लिए लगाया जाता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, काला रंग नकारात्मक ऊर्जा को सोखने और दूर करने की क्षमता रखता है।
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प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य जय मदान (जई मदान) के अनुसार, यह टीका न केवल बुरी नजर से रक्षा करता है बल्कि शनि ग्रह के प्रभाव को भी संतुलित करता है।नजर टीका का ज्योतिषीय महत्वज्योतिषीय मान्यताओं में काजल या काला टीका शनि देव से जुड़ा है। यदि कुंडली में शनि की स्थिति प्रबल हो या साढ़ेसाती/ढैय्या चल रही हो, तो माथे, आंखों के कोनों या कान के पीछे काला टीका लगाने से नकारात्मक ऊर्जा अवशोषित होती है।
शनि आंखों, बालों और कर्म पर शासन करता है, इसलिए यह उपाय अनुशासन, स्वास्थ्य और कर्म में सुधार लाता है। बुरी नजर को नकारात्मक ऊर्जा माना जाता है, जो ईर्ष्या या प्रशंसा से उत्पन्न होती है। काला टीका एक सुरक्षात्मक ढाल की तरह काम करता है, जो इस ऊर्जा को व्यक्ति तक पहुंचने से रोकता है। बच्चों में यह अधिक प्रभावी है क्योंकि उनकी ऊर्जा संवेदनशील होती है।
नजर टीका लगाने का सही तरीका
ज्योतिषाचार्य के अनुसार घर से बाहर निकलने से पहले आंखों के बाहरी कोनों या माथे पर छोटा सा काजल का टीका लगाएं।
टीका दोषपूर्ण और अनाकर्षक होना चाहिए – यानी सुंदर बिंदी की तरह नहीं, बल्कि असमान और सादा, ताकि यह नकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित कर सोख ले।
बाहर से घर लौटते समय टीका टिश्यू या कपड़े से साफ कर लें, ताकि नकारात्मकता घर में न आए।
यदि आपको ज्यादा तारीफ, घूरती निगाहें या ध्यान मिला हो, तो टीके वाली जगह को खारे पानी से धोएं। नमक और खारा पानी औरा को संतुलित करता है और बुरी नजर को दूर भगाता है।
यह उपाय वयस्कों के लिए भी उपयोगी है, खासकर जो शनि के प्रभाव या नजर दोष से पीड़ित हों।
अतिरिक्त लाभ और सावधानियां
वैज्ञानिक दृष्टि से भी काजल में मौजूद तत्व आंखों को ठंडक देते हैं और संक्रमण से बचाते हैं, लेकिन बच्चों पर घर का बना या सुरक्षित काजल ही इस्तेमाल करें। यह परंपरा न केवल आध्यात्मिक सुरक्षा देती है बल्कि परिवार में सकारात्मक ऊर्जा बनाए रखती है।
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