नई दिल्ली, 16 दिसंबर 2025। National Herald Case: नेशनल हेराल्ड से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में कांग्रेस की शीर्ष नेतृत्व सोनिया गांधी और राहुल गांधी को दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट से बड़ी कानूनी राहत मिली है। 16 दिसंबर 2025 को विशेष जज विशाल गोगने की अदालत ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा अप्रैल 2025 में दाखिल चार्जशीट (प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट) पर संज्ञान लेने से इनकार कर दिया। इससे गांधी परिवार समेत अन्य आरोपियों के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग के तहत ट्रायल की प्रक्रिया फिलहाल आगे नहीं बढ़ेगी।
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कोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि ED की शिकायत निजी व्यक्ति (BJP नेता सुब्रमण्यम स्वामी) की कंप्लेंट और मजिस्ट्रेट के समन आदेशों पर आधारित है, न कि किसी विधिवत FIR (प्रेडिकेट ऑफेंस) पर, इसलिए PMLA के तहत संज्ञान नहीं लिया जा सकता। हालांकि, अदालत ने ED को जांच जारी रखने की पूरी स्वतंत्रता दी है। कोर्ट ने कहा कि एजेंसी तथ्यों और साक्ष्यों को इकट्ठा करना जारी रख सकती है।
इसके साथ ही, कोर्ट ने दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) द्वारा हाल ही में दर्ज नई FIR की कॉपी देने की मांग को भी खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि सोनिया गांधी, राहुल गांधी और अन्य आरोपी इस चरण पर FIR की प्रतिलिपि पाने के हकदार नहीं हैं, क्योंकि मामला मूल रूप से निजी शिकायत पर आधारित है। ED ने चार्जशीट में सोनिया गांधी, राहुल गांधी, सैम पित्रोदा, सुमन दुबे, सुनील भंडारी, यंग इंडियन प्राइवेट लिमिटेड (YI) और डोटेक्स मर्चेंडाइज प्राइवेट लिमिटेड को आरोपी बनाया था।
आरोप है कि कांग्रेस के ₹90 करोड़ के लोन को यंग इंडियन कंपनी के जरिए एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (AJL, नेशनल हेराल्ड की प्रकाशक) की करीब ₹2000 करोड़ की संपत्तियों पर धोखाधड़ी से कब्जा किया गया। यंग इंडियन में सोनिया और राहुल की बहुमत हिस्सेदारी है। इससे पहले, ED की शिकायत पर दिल्ली पुलिस की EOW ने अक्टूबर 2025 में नई FIR दर्ज की थी, जिसमें गांधी परिवार के अलावा सुमन दुबे, सैम पित्रोदा, YI, डोटेक्स और AJL को नामजद किया गया। ये नाम ED की चार्जशीट में भी शामिल हैं।
मूल मामला 2012 में सुब्रमण्यम स्वामी की निजी शिकायत पर शुरू हुआ था, जिसमें धोखाधड़ी और विश्वासघात के आरोप लगाए गए थे। कांग्रेस ने इस पूरे मामले को राजनीतिक बदले की कार्रवाई करार दिया है, जबकि ED इसे गंभीर मनी लॉन्ड्रिंग का मामला मानती है। कोर्ट का यह फैसला तकनीकी आधार पर है और आरोपों के मेरिट पर कोई टिप्पणी नहीं की गई। अगर भविष्य में प्रेडिकेट ऑफेंस में FIR या चार्जशीट दाखिल होती है, तो ED दोबारा प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट पेश कर सकती है। फिलहाल, यह गांधी परिवार के लिए महत्वपूर्ण राहत है, लेकिन मामला पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।
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