मुंबई, 21 दिसंबर 2025। Mumbai BMC Election: महाराष्ट्र की सबसे अमीर और प्रतिष्ठापूर्ण बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) चुनावों की तारीखें घोषित हो चुकी हैं। राज्य चुनाव आयोग ने 15 जनवरी 2026 को मतदान और 16 जनवरी को मतगणना का ऐलान किया है। कुल 227 सीटों वाली BMC पर सत्ता हासिल करने के लिए सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन (BJP, शिंदे शिवसेना और अजित पवार NCP) में सीट शेयरिंग को लेकर चर्चाएं तेज हैं, लेकिन नवाब मलिक के मुद्दे ने बड़ा पेंच फंसा दिया है।
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सूत्रों के अनुसार, पहले महायुति में 150:50:27 का फॉर्मूला चर्चा में था, जिसमें BJP को 150 सीटें, एकनाथ शिंदे की शिवसेना को 50 और अजित पवार की NCP को 27 सीटें मिलने की बात थी, लेकिन नवाब मलिक पर लगे आरोपों (मनी लॉन्ड्रिंग और अंडरवर्ल्ड लिंक) के कारण BJP ने स्पष्ट कर दिया है कि अगर मलिक मुंबई में NCP की चुनावी कमान संभालते हैं, तो गठबंधन नहीं होगा।
BJP मुंबई अध्यक्ष अमित साटम और मंत्री आशीष शेलार ने कहा कि मलिक के नेतृत्व में NCP के साथ कोई समझौता नहीं। इसके बाद BJP और शिंदे शिवसेना ने अलग से बैठकें कीं और 227 में से 150 सीटों पर सहमति बना ली है। ये दोनों दल मिलकर इन 150 सीटों पर चुनाव लड़ेंगे, जबकि बाकी 77 सीटों पर अगले 2-3 दिनों में फैसला होगा। महायुति का लक्ष्य 150 से अधिक सीटें जीतकर मराठी मेयर बनाना है।
शिंदे सेना ने शुरू में 90-100 सीटों की मांग की थी, लेकिन अब समझौता हो रहा है। BJP 130-140 सीटें लड़ सकती है, जबकि शिंदे सेना को 70-80 मिल सकती हैं। यदि कोई विवाद रहता है, तो CM देवेंद्र फडणवीस और DCM एकनाथ शिंदे खुद फैसला लेंगे।NCP की स्थिति अनिश्चित है। अजित पवार ने नवाब मलिक को मुंबई चुनाव की कमान सौंपी है, जिससे BJP नाराज है।
NCP 50 से अधिक सीटें मांग रही है, लेकिन BJP ने उन्हें बाहर रखा है। NCP अब अकेले लड़ने या अन्य विकल्प तलाशने की तैयारी कर रही है, हालांकि सुनील तटकरे ने कहा कि गठबंधन की कोशिश जारी है। अगर मलिक का मुद्दा सुलझता है (जैसे उनकी बेटी सना मलिक को कमान देना), तो NCP शामिल हो सकती है।विपक्ष में महाविकास आघाड़ी (MVA) भी बंटी नजर आ रही है।
कांग्रेस अकेले लड़ने का ऐलान कर चुकी है, जबकि उद्धव ठाकरे की शिवसेना और राज ठाकरे की MNS गठबंधन की ओर बढ़ रहे हैं। शरद पवार की NCP 20 सीटें मांग रही है। ठाकरे बंधु ‘मराठी-मुस्लिम’ समीकरण पर फोकस कर रहे हैं।BMC में सिंगल मेंबर वार्ड सिस्टम है, यानी हर वार्ड से एक पार्षद। बजट 74,000 करोड़ से अधिक का है, इसलिए यह चुनाव राजनीतिक प्रतिष्ठा का सवाल है।
महायुति भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन का वादा कर रही है, जबकि विपक्ष विकास और स्थानीय मुद्दों पर हमला बोल रहा है।चुनाव की हलचल से मुंबई की सियासत गरमा गई है। देखना यह है कि नवाब मलिक का पेंच कैसे सुलझता है और महायुति एकजुट रह पाती है या नहीं।
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