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Modi-Putin Meet: भारत-रूस संबंधों को मिलेगी नई ऊंचाई, स्वास्थ्य, खाद्य सुरक्षा और शिपबिल्डिंग पर समझौतों की मुहर

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Modi-Putin Meet

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 नई दिल्ली, 5 दिसंबर 2025। Modi-Putin Meet: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच 23वें भारत-रूस शिखर सम्मेलन में द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने के लिए कई महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर हुए। यह यात्रा रूस के यूक्रेन संघर्ष के बाद पुतिन की पहली भारत यात्रा है, जो दोनों देशों की ‘ध्रुव तारे’ जैसी अटूट मित्रता को रेखांकित करती है।

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सम्मेलन में स्वास्थ्य, खाद्य सुरक्षा, शिपबिल्डिंग और समुद्री लॉजिस्टिक्स जैसे क्षेत्रों पर विशेष जोर दिया गया, जिससे 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 100 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य साकार करने की दिशा में कदम बढ़े। स्वास्थ्य क्षेत्र में चिकित्सा विज्ञान और स्वास्थ्य देखभाल पर समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर हुए, जो दोनों देशों के बीच चिकित्सा अनुसंधान, दवा विकास और स्वास्थ्य सेवाओं के आदान-प्रदान को बढ़ावा देगा।

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भारतीय स्वास्थ्य मंत्रालय और रूसी स्वास्थ्य संगठनों के बीच सहयोग से महामारी प्रबंधन और चिकित्सा शिक्षा में नई संभावनाएं खुलेंगी। पुतिन ने कहा कि ये समझौते रणनीतिक साझेदारी को और गहरा करेंगे, जबकि मोदी ने स्वास्थ्य क्षेत्र में रूस की विशेषज्ञता का स्वागत किया। खाद्य सुरक्षा के मोर्चे पर भारत के फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एफएसएसएआई) और रूस के उपभोक्ता संरक्षण निकाय के बीच एमओयू पर मुहर लगी।

यह समझौता खाद्य उत्पादों की गुणवत्ता मानकों, निर्यात-आयात सुरक्षा और उपभोक्ता संरक्षण को मजबूत करेगा। दोनों देश ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा में सहयोग बढ़ाने पर सहमत हुए, खासकर उर्वरक क्षेत्र में। भारतीय कंपनियों ने रूस की यूरालकेम के साथ यूरिया संयंत्र स्थापित करने का सौदा किया, जो भारत की खाद्य उत्पादन क्षमता को बढ़ाएगा। शिपबिल्डिंग और समुद्री क्षेत्र में भी बड़ा कदम उठा। पोर्ट एंड शिपिंग सेक्टर पर एमओयू से जहाज निर्माण, मरम्मत और संचालन प्रशिक्षण में सहयोग होगा।

विशेष रूप से आर्कटिक-क्लास जहाजों के संयुक्त निर्माण पर चर्चा हुई, जो मुंबई और चेन्‍नई में प्रस्तावित शिपबिल्डिंग क्लस्टर्स को गति देगा। रूस ने ‘ग्रीन शिपबिल्डिंग’ और समुद्री लॉजिस्टिक्स में सहायता की पेशकश की, जबकि भारत ने अपनी 25,000 करोड़ रुपये की मरीन डेवलपमेंट फंड योजना का जिक्र किया। पुतिन ने भारत को ईंधन आपूर्ति में बाधा रहित सहयोग का आश्वासन दिया।अन्य समझौतों में प्रवासन और मोबिलिटी पर एमओयू शामिल है, जो भारतीय कुशल श्रमिकों की रूस यात्रा को सुरक्षित बनाएगा।

यूरेशियन इकोनॉमिक यूनियन के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (एफटीए) वार्ता को गति देने और 2030 तक आर्थिक सहयोग कार्यक्रम पर भी सहमति बनी। मोदी ने कहा कि ये कदम आतंकवाद विरोधी लड़ाई में कंधे से कंधा मिलाकर खड़े रहने की भावना को मजबूत करते हैं। यह शिखर सम्मेलन न केवल आर्थिक बल्कि रणनीतिक साझेदारी को नई दिशा देगा। रूस ने इंटरनेशनल बिग कैट एलायंस में शामिल होने का फैसला किया, जो पर्यावरण सहयोग का प्रतीक है। कुल मिलाकर, ये समझौते भारत-रूस संबंधों को 21वीं सदी की आवश्यकताओं के अनुरूप ढालेंगे, जहां ऊर्जा, व्यापार और तकनीकी हस्तांतरण प्रमुख होंगे।

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