नई दिल्ली, 11 दिसंबर। Modi In Ethiopia: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 16-17 दिसंबर 2025 को पूर्वी अफ्रीका के महत्वपूर्ण देश इथियोपिया की आधिकारिक यात्रा पर जा रहे हैं। यह उनकी इस साल की तीसरी अफ्रीकी यात्रा होगी। पहले घाना-नामीबिया और फिर जी-20 के लिए दक्षिण अफ्रीका जा चुके हैं। लेकिन इथियोपिया दौरा इसलिए सबसे खास है क्योंकि यह देश भारत को ग्लोबल साउथ का स्वाभाविक नेता मानता है और खुलकर उसकी वकालत कर रहा है।
इथियोपिया के प्रधानमंत्री अबी अहमद दुनिया के उन चुनिंदा नेताओं में हैं जो लगातार कहते हैं कि “ग्लोबल साउथ का नेतृत्व भारत के अलावा कोई और नहीं कर सकता”। पिछले साल और इस साल दोनों वॉइस ऑफ ग्लोबल साउथ समिट में उन्होंने सबसे जोरदार तरीके से यही बात दोहराई। 2023 में जब इथियोपिया को ब्रिक्स में शामिल कराया गया, तो भारत ने सबसे मजबूत पैरवी की थी। यह बात अबी अहमद बार-बार सार्वजनिक मंचों पर स्वीकार करते हैं।
आर्थिक रिश्ते भी मजबूत
आज भारत इथियोपिया का तीसरा सबसे बड़ा निवेशक और दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। 650 से ज्यादा भारतीय कंपनियों के पास वहां 5 अरब डॉलर से अधिक के निवेश लाइसेंस हैं, जिनमें से करीब 3 अरब डॉलर का निवेश हो चुका है। 2023-24 में भारत ने इथियोपिया को 490 मिलियन डॉलर का निर्यात किया।कृषि, मैन्युफैक्चरिंग, इंफ्रास्ट्रक्चर और आईटी क्षेत्र में भारतीय कंपनियां सक्रिय हैं।
तीन सदी पुराना गुजरात कनेक्शन
भारत-इथियोपिया संबंध कोई नया नहीं। 19वीं सदी के अंत में सबसे पहले गुजराती व्यापारी और शिक्षक इथियोपिया पहुंचे थे। उस दौर में पूरे इथियोपिया के स्कूलों में हजारों भारतीय (ज्यादातर गुजराती) शिक्षक पढ़ाते थे। दूर-दराज के गांवों तक भारतीय शिक्षकों की पहुंच थी और स्थानीय लोग उन्हें बहुत सम्मान देते थे। आज भी इथियोपिया के विश्वविद्यालयों में 150 से अधिक भारतीय प्रोफेसर कार्यरत हैं।
रणनीतिक महत्व भी बड़ा
इथियोपिया अफ्रीका का दूसरा सबसे अधिक आबादी वाला देश है (13 करोड़+) और तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था वाला देश। 2023-24 में इसकी जीडीपी ग्रोथ 8.1% रही। अफ्रीकी संघ (African Union) का मुख्यालय अदीस अबाबा में है, इसलिए इसे “अफ्रीका की राजधानी” भी कहा जाता है। ईसाई बहुल (लगभग 67%) होने के बावजूद भारत से इसके सांस्कृतिक और कूटनीतिक रिश्ते बेहद गर्मजोशी भरे हैं।
पीएम मोदी की इस यात्रा में द्विपक्षीय व्यापार, रक्षा सहयोग, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, कृषि और स्किल डेवलपमेंट पर विशेष जोर रहेगा। साथ ही ग्लोबल साउथ के एजेंडे को और मजबूत करने की रणनीति बनेगी।
इसे भी पढ़ें- Putin India Visit: न्यूक्लियर सहयोग से रक्षा सौदों तक, आज मोदी-पुतिन वार्ता में ये मुद्दे होंगे प्रमुख








