नई दिल्ली, 9 नवंबर 2025: MCD By Polls: दिल्ली की राजधानी में नगर निगम (MCD) के 12 वार्डों में उपचुनाव को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। भाजपा, आम आदमी पार्टी (AAP) और कांग्रेस तीनों दल अपनी-अपनी रणनीतियां तेज कर चुके हैं। राज्य निर्वाचन आयोग (SEC) द्वारा 3 नवंबर को जारी अधिसूचना के बाद नामांकन की अंतिम तिथि 10 नवंबर है, और आज 9 नवंबर को प्रमुख दलों द्वारा उम्मीदवारों की सूची जारी करने की पूरी संभावना है।
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यह उपचुनाव न केवल स्थानीय मुद्दों पर केंद्रित हैं, बल्कि आगामी दिल्ली विधानसभा चुनावों की पूर्वपीठिका भी माने जा रहे हैं। MCD के ये उपचुनाव उन 12 वार्डों में हो रहे हैं जहां काउंसलरों ने उच्च पदों पर चुनाव लड़ने के कारण सीटें खाली की थी। इनमें मुंडका, शालीमार बाग-बी, अशोक विहार, चांदनी चौक, चांदनी महल, द्वारका-बी, डिचांऊं कलां, नरैना, संगम विहार-ए, दक्षिण पूर्वी, ग्रेटर कैलाश और विनोद नगर शामिल हैं।
वर्तमान में इनमें से 9 वार्ड भाजपा के पास हैं, जबकि 3 AAP के नियंत्रण में हैं। भाजपा के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने बताया कि, पार्टी की केंद्रीय चुनाव समिति की बैठकें चल रही हैं, और आज या कल तक सभी 12 वार्डों के लिए उम्मीदवारों के नाम फाइनल हो जाएंगे। भाजपा का लक्ष्य इन सीटों पर अपनी पकड़ मजबूत करना है, खासकर उन वार्डों में जहां स्थानीय मुद्दे जैसे कचरा प्रबंधन, सड़क मरम्मत और जल संकट गंभीर हैं।
AAP, जो 2022 के MCD चुनाव में 134 सीटों के साथ बहुमत हासिल कर चुकी है, इन उपचुनावों को अपनी साख बचाने का मौका मान रही है। पार्टी के नेता ने कहा कि वे ‘मोहल्ला क्लीनिक’ और मुफ्त बिजली-पानी जैसी योजनाओं पर जोर देंगे। AAP ने भी अपनी उम्मीदवारों की सूची अंतिम रूप देने की प्रक्रिया शुरू कर दी है, और संभावना है कि आज घोषणा हो जाए। दूसरी ओर, कांग्रेस ने दिल्ली इकाई का पुनर्गठन कर लिया है।
अध्यक्ष देवेंद्र यादव के नेतृत्व में पार्टी छह नए जिला अध्यक्षों की नियुक्ति की है, और MCD उपचुनाव के लिए विशेष प्रभारी नियुक्त किए गए हैं। कांग्रेस का दांव ‘एंटी-भाजपा’ माहौल पर है, जहां वे बिजली-पानी संकट, प्रदूषण, सड़कें टूटना और महिलाओं के लिए 2500 रुपये मानदेय जैसे वादों पर भाजपा को घेरने की तैयारी में हैं।
इस डेट हो होगा चुनाव
मतदान 30 नवंबर को सुबह 10:30 से शाम 5:30 बजे तक होगा, और मतगणना 3 दिसंबर को। नामांकन की प्रक्रिया 3 नवंबर से शुरू हो चुकी है, और अंतिम जांच 11-12 नवंबर को होगी। SEC ने अनुसूचित जाति के उम्मीदवारों के लिए विशेष प्रावधान भी किए हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ,ये उपचुनाव भाजपा के लिए परीक्षा होंगे, क्योंकि 2022 में AAP की जीत के बाद MCD में उनकी स्थिति कमजोर हुई थी।
AAP की मेयर रेखा गुप्ता पर भी स्थानीय शासन की नाकामी के आरोप लग रहे हैं। इन उपचुनावों से दिल्ली की सड़कों पर प्रचार का दौर शुरू हो चुका है। पार्टियां डोर-टू-डोर कैंपेनिंग और सोशल मीडिया पर सक्रिय हैं। वोटरों की संख्या करीब 15 लाख अनुमानित है, और मतदान प्रतिशत बढ़ाने के लिए SEC ने विशेष अभियान चलाए हैं। कुल मिलाकर, यह उपचुनाव दिल्ली की राजनीति में नया मोड़ ला सकता है। दलों को उम्मीद है कि जीत से विधानसभा चुनावों में गति मिलेगी। मतदाता भी स्थानीय सुविधाओं पर नजर रखे हुए हैं ।
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