नई दिल्ली, 29 अक्टूबर 2025। MCD by-Elections: दिल्ली की राजनीति एक बार फिर गरमाई हुई नजर आ रही है। 27 साल बाद सत्ता हासिल करने वाली भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सामने अब नगर निगम (MCD) के 12 वार्डों में उपचुनाव की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। फरवरी 2025 में दिल्ली विधानसभा चुनाव में शानदार जीत के बाद यह BJP की पहली वास्तविक चुनावी कसौटी है।
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आम आदमी पार्टी (AAP) ने भी कमर कस ली है और सभी सीटों पर जीत का दावा ठोक दिया है। इन उपचुनावों से न केवल MCD का संतुलन प्रभावित होगा, बल्कि आने वाले राजनीतिक समीकरण भी बदल सकते हैं। उपचुनाव की घोषणा के साथ ही राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। इन 12 वार्डों में से नौ पर पहले BJP का कब्जा था, जबकि तीन AAP के पास थे। BJP का लक्ष्य न केवल अपने पारंपरिक गढ़ को बचाना है, बल्कि AAP के तीन वार्डों को भी छीन लेना है।
रिक्त वार्डों के पीछे मुख्य कारण विधानसभा चुनावों में BJP और AAP के पार्षदों का विधायक बनना है। उदाहरण के लिए, शालीमार बाग वार्ड से पूर्व मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता अब विधायक हैं, जबकि द्वारका बी से कमलजीत सहरावत सांसद चुनी गईं। इसी तरह, ग्रेटर कैलाश, ढिचाऊं कलां, नारायणा, संगम विहार, विनोद नगर, अशोक विहार और मुंडका जैसे BJP के मजबूत वार्ड रिक्त हुए हैं। AAP के चांदनी महल, चांदनी चौक और दक्षिणपुरी वार्ड भी दांव पर हैं। BJP अपनी रणनीति में सरकार की हालिया उपलब्धियों को हथियार बना रही है।
पिछले आठ महीनों में ‘ट्रिपल इंजन’ सरकार के तहत यमुना सफाई अभियान, छठ पूजा का भव्य आयोजन, कांवड़ यात्रा का प्रबंधन, दीपावली पर ग्रीन पटाखों की अनुमति और प्रदूषण नियंत्रण के लिए कृत्रिम वर्षा जैसे कदमों को जनता तक पहुंचाया जा रहा है। दिल्ली BJP अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा का दावा है कि इन प्रयासों से दिल्लीवासियों को सीधा लाभ हुआ है, जिससे सभी वार्डों में कमल खिलेगा।
पार्टी कार्यकर्ता घर-घर जाकर प्रधानमंत्री आयुष्मान योजना और अन्य कल्याणकारी योजनाओं का प्रचार कर रहे हैं। दूसरी ओर, AAP इस मौके को BJP की कमजोरियों पर हमला बोलने का अवसर मान रही है। पार्टी का कहना है कि उपचुनाव दिल्लीवालों को BJP सरकार की नाकामियों का आईना दिखाएंगे। हालांकि, AAP ने अभी तक विस्तृत रणनीति सार्वजनिक नहीं की है, लेकिन अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व में सड़क पर उतरने की तैयारी जोरों पर है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ये उपचुनाव MCD में बहुमत के लायक साबित हो सकते हैं, जहां BJP को अभी भी चुनौतियां हैं। यह मुकाबला न केवल स्थानीय मुद्दों पर केंद्रित है, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति को भी प्रभावित कर सकता है। 27 साल के लंबे इंतजार के बाद सत्ता में लौटी BJP के लिए यह जीत अनिवार्य है, वरना AAP को नई ऊर्जा मिल सकती है। उपचुनाव की तारीखों का ऐलान होते ही प्रचार युद्ध तेज हो जाएगा। क्या BJP अपनी लहर बरकरार रख पाएगी या AAP पुरानी चमक लौटा लेगी? इसका जवाब वोटर ही देंगे।
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