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Mayawati Rally: लखनऊ के बाद नोएडा में मायावती का शक्ति प्रदर्शन, BSP कैडर की ताकत से जनाधार साधने की रणनीति

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Mayawati Rally

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लखनऊ, 27 नवबंर 2025। Mayawati Rally: लखनऊ में हालिया सफल महारैली के बाद बहुजन समाज पार्टी (BSP) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती अब 6 दिसंबर को नोएडा में एक विशाल रैली आयोजित करने जा रही हैं। यह रैली डॉ. भीमराव अंबेडकर के परिनिर्वाण दिवस पर राष्ट्रीय दलित प्रेरणा स्थल पर होगी, जो मायावती के गृह जनपद गौतम बुद्ध नगर में 14 वर्षों बाद हो रही है। पार्टी सूत्रों के अनुसार, यह आयोजन न केवल BSP की संगठनात्मक क्षमता का प्रदर्शन होगा, बल्कि खिसकते जनाधार को पुनः मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित होगा।

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मायावती का यह कदम कांशीराम के पुराने अंदाज को जीवंत करने जैसा है, जहां कैडर-आधारित आंदोलन को फिर से जागृत किया जाएगा। पिछले कुछ चुनावों में BSP का वोट शेयर लगातार घटा है, खासकर दलित और मुस्लिम वोट बैंक में सेंगमारी के कारण। 2022 के यूपी विधानसभा चुनाव में पार्टी को मात्र 12.8% वोट मिले, जबकि 2007 में यह 30% से ऊपर था। बिहार उपचुनाव में एक सीट जीतने से कार्यकर्ताओं में उत्साह तो लौटा, लेकिन पश्चिमी यूपी में चंद्रशेखर आजाद की आजाद समाज पार्टी (AS P) से उभरती चुनौती ने मायावती को सतर्क कर दिया।

नोएडा रैली को ‘शक्ति प्रदर्शन 2.0’ का नाम दिया गया है, जहां मायावती विरोधी दलों को स्पष्ट संदेश देंगी कि BSP का कैडर अभी भी मजबूत और वफादार है। लखनऊ रैली में हजारों कार्यकर्ताओं की मौजूदगी ने पार्टी को नई ऊर्जा दी और अब नोएडा में देशभर से 50,000 से अधिक समर्थकों के आने की उम्मीद है। रैली की तैयारियां जोरों पर हैं। पार्टी के वरिष्ठ नेता सतीश चंद्र मिश्रा ने राष्ट्रीय दलित प्रेरणा स्थल का दौरा कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया।

मायावती के भतीजे और राष्ट्रीय संयोजक आकाश आनंद भी इसमें अहम भूमिका निभाएंगे, जो उनकी राजनीतिक री-लॉन्चिंग का हिस्सा माना जा रहा है। मंगलवार को लखनऊ में हुई पार्टी बैठक में इस रैली को अंतिम रूप दिया गया, जहां पश्चिमी यूपी के कार्यकर्ताओं को विशेष निर्देश दिए गए। मायावती ने कहा कि यह रैली बहुजन समाज को एकजुट करने का मंच बनेगी, जहां दलित, पिछड़े और अल्पसंख्यक वर्गों के मुद्दों पर जोर दिया जाएगा।

पार्टी ने कैडर कैंप्स के माध्यम से आधार मजबूत करने की योजना बनाई है, जो कांशीराम के मिशनरी मॉडल पर आधारित है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि, यह रैली मिशन-2027 का बिगुल फूंकने वाली होगी। मायावती, जो पिछले आठ वर्षों से किसी सदन की सदस्य नहीं हैं, इस मंच से सक्रिय राजनीति में कमबैक की कोशिश करेंगी। विरोधियों पर निशाना साधते हुए वे BJP पर दलित विरोधी नीतियों का आरोप लगाएंगी। साथ ही, SP और ASP जैसे दलों से वोट बंटवारे को रोकने की अपील करेंगी।

नोएडा का चुनावी महत्व भी बढ़ गया है, जहां गौतम बुद्ध नगर लोकसभा सीट पर BSP का पारंपरिक वर्चस्व रहा है। रैली में मुजफ्फरनगर, सहारनपुर और मेरठ जैसे पश्चिमी जिलों से बड़ी संख्या में कार्यकर्ता पहुंचेंगे।यह आयोजन BSP के लिए टर्निंग पॉइंट साबित हो सकता है। पार्टी ने हाल ही में संगठन में फेरबदल किया, जिसमें आकाश आनंद को प्रमुख जिम्मेदारी दी गई। कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाने के लिए मायावती ने कहा, “BSP एक मिशनरी आंदोलन है, जो बहुजन हितों की रक्षा करेगा।”

यदि रैली सफल रही, तो 2027 के यूपी चुनावों में BSP का ग्राफ ऊपर चढ़ सकता है। पश्चिमी यूपी के मतदाताओं को साधने की यह कवायद सफल होगी या नहीं, यह तो समय बताएगा, लेकिन मायावती की यह सियासी चाल निश्चित रूप से विपक्ष को सोचने पर मजबूर कर देगी। BSP समर्थक उत्साहित हैं, और नोएडा की सड़कें बहुजन जिंदाबाद के नारों से गूंजने को तैयार हैं।

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