महाराष्ट्र, 15 सितंबर 2025। Maharashtra: महाराष्ट्र के ठाणे जिले के मोहोने गांव और आसपास के करीब 10 अन्य गांवों में अडानी समूह की कंपनी अंबुजा सीमेंट लिमिटेड द्वारा प्रस्तावित सीमेंट प्लांट के खिलाफ व्यापक विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए हैं। स्थानीय निवासियों ने सिग्नेचर कैंपेन चलाकर हजारों हस्ताक्षर एकत्र किए हैं, जो 16 सितंबर 2025 को महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (MPCB) द्वारा आयोजित होने वाली पब्लिक हियरिंग के खिलाफ है।
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प्रदर्शनकारी दावा कर रहे हैं कि यह प्लांट, जो मुंबई महानगर क्षेत्र (MMR) में स्थित है, घनी आबादी वाले इलाके में स्थापित होने से स्वास्थ्य, पर्यावरण और आजीविका पर गंभीर खतरा पैदा करेगा। गांवों में उच्च-उन्नत इमारतों के निर्माण के बीच स्थित मोहोने जैसे घनी बस्तियों में रहने वाले लोग हवा की गुणवत्ता बिगड़ने, धूल प्रदूषण और शोर से चिंतित हैं। कंजर्वेशन एक्शन ट्रस्ट के एक्जीक्यूटिव ट्रस्टी डेबी गोエンका ने कहा, “सीमेंट ग्राइंडिंग यूनिट्स को घनी आबादी वाले क्षेत्रों में अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।
यहां कणीय पदार्थ (पार्टिकुलेट मैटर) का उच्च उत्सर्जन होता है, जो सांस संबंधी बीमारियों को बढ़ावा देगा।” स्थानीय निवासियों ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, पर्यावरण मंत्री पंकजा मुंडे, कल्याण-डोंबिवली म्यूनिसिपल कॉर्पोरेशन (KDMC) के कमिश्नर और MPCB अधिकारियों को पत्र लिखकर प्रोजेक्ट रद्द करने की मांग की है। यह विरोध धारावी रिडेवलपमेंट प्रोजेक्ट के बाद अडानी समूह का मुंबई महानगर क्षेत्र में दूसरा बड़ा विवादास्पद प्रोजेक्ट बन गया है, जहां स्थानीय समुदाय अपनी जमीन, स्वास्थ्य और पर्यावरण की रक्षा के लिए सड़कों पर उतर आए हैं।
धारावी रिडेवलपमेंट प्रोजेक्ट, जो एशिया का सबसे बड़ा स्लम क्लस्टर है, अडानी समूह को नवंबर 2022 में 5,069 करोड़ रुपये की बोली के साथ सौंपा गया था। यह 23,000 करोड़ रुपये का महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट है, जिसमें 259 हेक्टेयर क्षेत्र को आधुनिक टाउनशिप में बदला जाना है, जिसमें आवासीय, वाणिज्यिक और औद्योगिक स्पेस शामिल हैं। हालांकि, विपक्षी दलों ने इसे ‘मोदी-अडानी एंटरप्राइज’ करार देते हुए महायुति सरकार पर अडानी को अनुचित लाभ देने का आरोप लगाया है।
शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने दिसंबर 2023 में ‘रिमूव अडानी, सेव धारावी’ के नारे के साथ हजारों लोगों का मार्च निकाला था, जिसमें इं-सीटू रिहैबिलिटेशन (मौके पर ही पुनर्वास) की मांग की गई। कांग्रेसी नेता वरशा गायकवाड़ ने अगस्त 2024 में ‘धारावी न्याय यात्रा’ आयोजित की, जहां बेदखली और विस्थापन के डर को उजागर किया गया। प्रोजेक्ट के तहत धारावी के कुम्हारों की बस्ती को ध्वस्त करने की योजना है, और सॉल्ट पैन लैंड (255 एकड़) पर हाई-राइज टावर्स बन रहे हैं, जहां फ्लैटों की कीमत 20,000 डॉलर से शुरू होती है।
बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिकाएं दायर हो चुकी हैं, जहां दावा किया गया कि टेंडर प्रक्रिया में अडानी को फायदा पहुंचाने के लिए नियम बदले गए। महाराष्ट्र सरकार ने सितंबर 2024 में सॉल्ट पैन लैंड का ट्रांसफर धारावी रिडेवलपमेंट प्रोजेक्ट प्राइवेट लिमिटेड (DRPPL) को मंजूर किया, जिसमें अडानी का 80% शेयर है। विपक्ष का कहना है कि यह प्रोजेक्ट स्लम वासियों को किराए की जमीन पर भेजने का बहाना है, जबकि अडानी को ट्रांसफर ऑफ डेवलपमेंट राइट्स (TDR) से अरबों का लाभ मिलेगा। धारावी में अपराध दर कम हुई है, लेकिन ड्रग तस्करी जैसी समस्याएं बरकरार हैं, और प्रदर्शनकारी विकास के नाम पर स्लम वासियों के शोषण का आरोप लगा रहे हैं।
अंबुजा सीमेंट का प्रस्तावित प्लांट ठाणे के मोहोने में सीमेंट ग्राइंडिंग यूनिट के रूप में स्थापित होगा, जो कच्चे माल को पीसकर सीमेंट उत्पादन करेगा। MPCB की पब्लिक हियरिंग में पर्यावरणीय मंजूरी मांगी गई है, लेकिन स्थानीय लोग इसे घनी आबादी (स्काईस्क्रैपर्स से घिरा) के बीच खतरा मानते हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि प्लांट से निकलने वाली धूल फेफड़ों की बीमारियां, अस्थमा और कैंसर का कारण बनेगी। KDMC क्षेत्र में पहले से ही प्रदूषण की समस्या है, और यह प्लांट हवा, पानी और मिट्टी को दूषित करेगा।
सिग्नेचर कैंपेन में महिलाएं और युवा अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं, जो अपनी आजीविका (कृषि और छोटे व्यवसाय) के लिए चिंतित हैं। कंपनी का दावा है कि प्रोजेक्ट पर्यावरण मानकों का पालन करेगा। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि सीमेंट उद्योग से पार्टिकुलेट मैटर (PM2.5 और PM10) का उत्सर्जन 20-30% तक बढ़ सकता है, जो MMR की वायु गुणवत्ता को और खराब करेगा। यह विवाद अडानी के अन्य महाराष्ट्र प्रोजेक्ट्स जैसे चंद्रपुर में लैंड ग्रैब (जून 2025) और कोल्हापुर में हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट (2023) से जुड़ता है, जहां किसानों ने मुआवजे की कमी का विरोध किया। चंद्रपुर में अंबुजा ने कोर्पना तहसील के चार गांवों में जमीन खरीदी, लेकिन किसानों को वादा किया मुआवजा नहीं मिला, जिससे ‘लैंड बैंकिंग’ का आरोप लगा।
यह विवाद महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों से पहले सियासी रंग ले चुका है। महा विकास अघाड़ी (MVA) ने अडानी को ‘मोदी-अडानी’ का प्रतीक बताते हुए महायुति पर पक्षपात का आरोप लगाया है। उद्धव ठाकरे ने कहा, “महाराष्ट्र को अडानी सिटी नहीं बनने देंगे।” वहीं, महायुति सरकार विकास को बढ़ावा देने का दावा कर रही है। धारावी प्रोजेक्ट में सितंबर 2025 में अडानी को 6,600 MW बंडल्ड पावर सप्लाई का कॉन्ट्रैक्ट मिला, जिसे विपक्ष ने ‘फेवर’ बताया। सीमेंट प्लांट के खिलाफ ग्रामीणों ने ग्राम सभाओं में प्रस्ताव पारित किए हैं, और यदि पब्लिक हियरिंग रद्द नहीं हुई, तो बड़े पैमाने पर धरना-प्रदर्शन की चेतावनी दी है।
पर्यावरण कार्यकर्ता राजेंद्र कोर्डे ने बॉम्बे हाईकोर्ट में चुनौती दी है, जहां दावा है कि अडानी ने कुम्हार बस्ती को जानबूझकर ज्यादा संख्या दिखाकर TDR बढ़ाने की कोशिश की। कुल मिलाकर, ये प्रदर्शन विकास बनाम पर्यावरण की बहस को तेज कर रहे हैं। यदि प्रोजेक्ट रुका, तो अडानी को आर्थिक नुकसान होगा, लेकिन स्थानीय समुदायों को राहत मिलेगी। महाराष्ट्र सरकार को अब संतुलित नीति अपनानी होगी, ताकि औद्योगीकरण और स्थानीय हितों का टकराव न हो। विशेषज्ञों का मानना है कि MPCB को स्वतंत्र जांच करनी चाहिए, अन्यथा विवाद और बढ़ेगा। यह घटना न केवल अडानी समूह, बल्कि पूरे औद्योगिक विकास मॉडल पर सवाल खड़े करती है।
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