- मंत्री असीम अरुण ने दिखाई त्वरित कार्रवाई: निजी सचिव पर छेड़छाड़ का आरोप, हिरासत में
-
लखनऊ में महिला कर्मचारी से छेड़छाड़, मंत्री असीम अरुण की त्वरित कार्रवाई से आरोपी गिरफ्तार
लखनऊ 31 जुलाई। Lucknow Molestation: उत्तर प्रदेश की राजधानी, में एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है। सामाजिक कल्याण विभाग में कार्यरत एक महिला कर्मचारी के साथ कथित तौर पर छेड़छाड़ का मामला सामने आया है। यह घटना तब और सुर्खियों में आई, जब खुद सामाजिक कल्याण मंत्री असीम अरुण ने इस मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए पुलिस को सूचित किया और आरोपी को गिरफ्तार करवाया। आरोपी कोई और नहीं, बल्कि मंत्री का निजी सचिव है, जिस पर महिला कर्मचारी ने गंभीर आरोप लगाए हैं।
यह घटना 31 जुलाई 2025 को लखनऊ के सामाजिक कल्याण विभाग के कार्यालय में हुई। जानकारी के अनुसार, महिला कर्मचारी ने निजी सचिव पर अनुचित व्यवहार और छेड़छाड़ का आरोप लगाया। शिकायत मिलते ही मंत्री असीम अरुण ने मामले की गंभीरता को समझते हुए तुरंत पुलिस को सूचित किया। लखनऊ पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी निजी सचिव को हिरासत में ले लिया। प्रारंभिक जांच में पुलिस ने बताया कि महिला कर्मचारी की शिकायत के आधार पर भारतीय दंड संहिता की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।
मंत्री असीम अरुण ने इस घटना पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान उनकी प्राथमिकता है। उन्होंने इस मामले में जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाने की बात कही और आश्वासन दिया कि दोषी को कड़ी सजा मिलेगी। यह घटना कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े करती है। खासकर, जब यह मामला सरकार के एक महत्वपूर्ण विभाग से जुड़ा हो, तो इसकी गंभीरता और बढ़ जाती है।महिला कर्मचारी ने अपनी शिकायत में बताया कि निजी सचिव ने कई बार उनके साथ अनुचित व्यवहार किया, जिसके बाद उन्होंने इसकी शिकायत विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों और मंत्री से की।
मंत्री असीम अरुण की त्वरित प्रतिक्रिया ने न केवल पीड़िता को न्याय का भरोसा दिलाया, बल्कि यह भी दिखाया कि सरकार इस तरह के मामलों में गंभीरता से कार्रवाई करने के लिए प्रतिबद्ध है।लखनऊ पुलिस ने बताया कि मामले की जांच शुरू कर दी गई है और जल्द ही सभी तथ्यों को सामने लाया जाएगा। इस बीच, सामाजिक कल्याण विभाग में इस घटना के बाद कर्मचारियों के बीच तनाव का माहौल है। कई संगठनों और महिला अधिकार कार्यकर्ताओं ने इस मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। साथ ही, कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा के लिए और सख्त कदम उठाने की जरूरत पर जोर दिया है।
यह घटना न केवल लखनऊ, बल्कि पूरे देश में कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा के मुद्दे को फिर से चर्चा में ला सकती है। सरकार और प्रशासन के लिए यह एक अवसर है कि वे ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस नीतियां बनाएं और उनकी सख्ती से लागू करें।








