लखनऊ, 19 सितंबर 2025। Lucknow Land Scam: उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर मुलायम सिंह यादव परिवार का नाम विवादों से जुड़ गया है। लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) के प्रियदर्शिनी जानकीपुरम योजना में भूखंड आवंटन घोटाले के मामले में अंबी बिष्ट का नाम प्रमुखता से सामने आया है। अंबी बिष्ट, जो पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव की समधन हैं, पर भ्रष्टाचार और आपराधिक साजिश के आरोप लगे हैं। उत्तर प्रदेश विजिलेंस विभाग ने हाल ही में अंबी बिष्ट समेत पांच एलडीए अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है।
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यह मामला समाजवादी पार्टी (सपा) के संस्थापक परिवार की छवि पर सवाल खड़े कर रहा है। अंबी बिष्ट मूल रूप से उत्तर प्रदेश सरकार की नौकरशाह रही हैं। वे लखनऊ नगर निगम और एलडीए में विभिन्न पदों पर तैनात रहीं। 2021 में उन्हें जोनल अधिकारी के पद से हटाने की सिफारिश तक हुई थी, जब नगर आयुक्त अजय कुमार त्रिवेदी ने कामकाज में लापरवाही का आरोप लगाया। अंबी बिष्ट ने खुद पर राजनीतिक दबाव का दावा किया था। 2022 में उनका बाराबंकी नगर निगम में ट्रांसफर हुआ, जहां वे 25 वर्षों बाद लखनऊ से बाहर हुईं। लेकिन अब 2025 में विजिलेंस की जांच ने पुराने घोटाले को फिर से उजागर कर दिया।
जांच में पाया गया कि प्रियदर्शिनी योजना के भूखंडों के आवंटन में नियमों का उल्लंघन कर रजिस्ट्रेशन कराए गए। उस समय अंबी बिष्ट एलडीए में संपत्ति अधिकारी थीं, और उन्होंने कथित तौर पर गड़बड़ी में मुख्य भूमिका निभाई। मुलायम सिंह यादव फैमिली से अंबी बिष्ट का सीधा रिश्ता है। वे अरविंद सिंह बिष्ट की पत्नी हैं, जो पूर्व सूचना आयुक्त रह चुके हैं। अंबी की बेटी अपर्णा यादव मुलायम के छोटे बेटे प्रतीक यादव की पत्नी हैं। अपर्णा वर्तमान में यूपी महिला आयोग की उपाध्यक्ष हैं और भाजपा से जुड़ी हुई हैं। यह विवाह 1998 में हुआ था, जो सपा परिवार में एक महत्वपूर्ण गठबंधन था।
अंबी बिष्ट को ‘मुलायम की समधन’ के रूप में जाना जाता है। 2018 में एलडीए कार्यालय से गहने चोरी के आरोप में उन्होंने वीसी पीएन सिंह पर केस किया था, जो खारिज हो गया। आरटीआई से भी पता चला कि अंबी और उनके पति पर राज्य संपत्ति विभाग में बकाया था।विजिलेंस की एफआईआर में अंबी बिष्ट के अलावा एलडीए के तत्कालीन अनुभाग अधिकारी वीरेंद्र सिंह, उप सचिव देवेंद्र सिंह राठौड़, वरिष्ठ कॉस्ट अकाउंटेंट बी महादनी और अवर सहायक शैलेंद्र कुमार गुप्ता नामित हैं। आरोप है कि भूखंडों के आवंटन में फर्जीवाड़ा कर सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचाया गया।
सपा नेताओं ने इसे राजनीतिक साजिश बताया है, जबकि भाजपा ने पारदर्शिता की मिसाल दी। अपर्णा यादव ने अभी चुप्पी साध रखी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला यूपी की नौकरशाही और राजनीतिक परिवारों के बीच नेक्सस को उजागर करता है। अदालत अब जांच आगे बढ़ाएगी, और अंबी बिष्ट की गिरफ्तारी संभव है। यह घटना मुलायम परिवार की विरासत पर एक और दाग लगा सकती है।








