नई दिल्ली, 11 दिसंबर 2025। Land For Jobs Scam: दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने रेलवे के कथित ‘जमीन के बदले नौकरी’ भ्रष्टाचार मामले में पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव, उनकी पत्नी राबड़ी देवी, बेटे तेजस्वी यादव सहित परिवार के अन्य सदस्यों और 103 अन्य आरोपियों के खिलाफ आरोप तय करने की सुनवाई टाल दी है।
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विशेष CBI जज विशाल गोगने ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की सभी आरोपियों की स्थिति वेरिफाई करने की मांग को स्वीकार करते हुए मामले को 15 दिसंबर के लिए स्थगित कर दिया। यह तीसरी बार है जब सुनवाई टली है – पहले 4 दिसंबर और फिर 8 दिसंबर को भी स्थगित हो चुकी थी। CBI ने कोर्ट को बताया कि 103 आरोपियों में से चार की मौत हो चुकी है, इसलिए उनकी स्थिति स्पष्ट करने के लिए अतिरिक्त समय चाहिए।
जज गोगने इस बात की जांच कर रहे हैं कि क्या आरोपियों के खिलाफ आरोप तय करने के लिए पर्याप्त साक्ष्य मौजूद हैं। इससे पहले 4 दिसंबर को कोर्ट ने CBI को आरोपियों की स्थिति वेरिफाई कर रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया था। यह मामला 2004-2009 के बीच लालू यादव के रेल मंत्री रहते जबलपुर स्थित पश्चिम-मध्य रेलवे जोन में ग्रुप-डी पदों पर की गई नियुक्तियों से जुड़ा है।
CBI का आरोप है कि रेलवे की नौकरियां देने के बदले उम्मीदवारों ने लालू परिवार या उनके करीबियों के नाम पर बिहार की मूल्यवान जमीनें ‘उपहार’ के रूप में हस्तांतरित कीं। ये जमीनें बाजार मूल्य से काफी कम दरों पर ली गईं और कई लेन-देन नकद हुए। एजेंसी ने इसे बेहिसाब संपत्ति अर्जन, आपराधिक साजिश, भ्रष्टाचार और नियमों का उल्लंघन बताया है।
CBI का दावा है कि लालू की स्थिति का दुरुपयोग कर उम्मीदवारों की योग्यता मानदंडों में बदलाव किया गया। लालू परिवार ने सभी आरोपों से इनकार करते हुए इसे राजनीतिक साजिश करार दिया है। जुलाई 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने लालू की ट्रायल रोकने की याचिका खारिज कर दी थी, लेकिन उनकी उम्र को देखते हुए पर्सनल उपस्थिति में छूट दी। ईडी के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में लालू और उनके बेटों तेजस्वी व तेज प्रताप को जमानत मिल चुकी है।
कोर्ट ने नोट किया था कि लालू “सार्वजनिक रोजगार सुविधा प्रदान करने की स्थिति में थे” और जमीनें “बाजार मूल्य से सस्ते में” ली गईं। तेज प्रताप की संलिप्तता को भी नकारा नहीं गया।यह घोटाला बिहार की राजनीति के लिए बड़ा मुद्दा है, खासकर 2025 विधानसभा चुनावों के बाद। RJD प्रमुख लालू की सेहत खराब होने के बावजूद परिवार पर CBI-ED की जांच का दबाव बना हुआ है।
अगली सुनवाई में अगर आरोप तय हुए तो ट्रायल तेज हो सकता है, जो तेजस्वी की राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं को प्रभावित करेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला यूपीए सरकार के समय की भ्रष्टाचार की काली तस्वीर उजागर करता है। फिलहाल, स्थगन से लालू परिवार को अस्थायी राहत मिली है, लेकिन न्याय की प्रक्रिया जारी रहेगी।
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